नई दिल्ली। सोने की कीमतों को लेकर बाजार में एक बार फिर बड़ी भविष्यवाणी सामने आई है। टोरंटो स्थित ब्रोकरेज फर्म मैसन प्लेसमेंट्स के अध्यक्ष और अनुभवी इन्वेस्टमेंट बैंकर जॉन इंग ने दावा किया है कि आने वाले समय में सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार, सोने का भाव 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है, जो भारतीय बाजार में लगभग 1.85 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के बराबर बैठता है।
जॉन इंग ने अपनी रिपोर्ट में सोने की इस संभावित तेजी के पीछे कई बड़े कारण बताए हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण अमेरिका पर बढ़ता हुआ भारी कर्ज, डॉलर की घटती वैश्विक पकड़ और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा तेजी से सोने की खरीदारी करना शामिल है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोने की मांग लगातार मजबूत हो रही है।
अमेरिका पर बढ़ता कर्ज बना चिंता का कारण
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का संघीय कर्ज करीब 39 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इस कर्ज पर हर साल लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक ब्याज भुगतान करना पड़ रहा है। जॉन इंग का मानना है कि अमेरिका की बढ़ती वित्तीय चुनौतियां वैश्विक बाजारों में चिंता पैदा कर रही हैं और इसका सीधा फायदा सोने को मिल सकता है।
इतिहास में जब भी आर्थिक अस्थिरता, महंगाई या किसी बड़े वित्तीय संकट की स्थिति बनी है, तब सोने को निवेशकों ने सुरक्षित संपत्ति के रूप में चुना है। यही वजह है कि बढ़ते कर्ज और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने की मांग में तेजी देखने को मिल रही है।
डॉलर के कमजोर होते दबदबे से सोने को फायदा
जॉन इंग ने डॉलर की घटती वैश्विक हिस्सेदारी को भी सोने की तेजी का बड़ा कारण बताया है। उनके मुताबिक, साल 1999 में वैश्विक रिजर्व में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 54 प्रतिशत रह गई है।
दुनिया के कई देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता ला रहे हैं और डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सोना एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहा है। डॉलर की कमजोरी आमतौर पर सोने की कीमतों को समर्थन देती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार डॉलर में होता है।
केंद्रीय बैंक लगातार खरीद रहे हैं सोना
सोने की कीमतों में तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी अहम भूमिका निभा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने इस साल की पहली तिमाही में 244 टन सोना खरीदा है।
चीन लगातार सोने की खरीदारी कर रहा है और उसका स्वर्ण भंडार हजारों टन तक पहुंच चुका है। वहीं पोलैंड जैसे देशों ने भी अपने सोने के भंडार को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। कई देश राजनीतिक जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए विदेशी वॉल्ट में रखे अपने सोने को वापस अपने देश में ला रहे हैं।
गोल्ड माइनिंग कंपनियों को होगा फायदा
जॉन इंग का कहना है कि अगर सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचता है तो गोल्ड माइनिंग कंपनियों को भी बड़ा फायदा हो सकता है। सोने की ऊंची कीमतों से इन कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा और वे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश कर सकेंगी।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में तेजी कई वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। ब्याज दरों में बदलाव, डॉलर की स्थिति, महंगाई और दुनिया की आर्थिक स्थिति सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
भारत में सोने की कीमतों पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर-रुपये की विनिमय दर और आयात शुल्क जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो भारतीय बाजार में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल जॉन इंग की भविष्यवाणी ने सोने के निवेशकों के बीच चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि यह अनुमान भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित है और वास्तविक कीमतें बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेंगी।