नई दिल्ली। कमोडिटी मार्केट में गुरुवार 3 सितंबर को कारोबार की शुरुआत सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सुबह के सौदों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में करीब 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने सोने-चांदी की कीमतों को समर्थन दिया। वैश्विक बाजार के संकेतों का असर भारतीय कमोडिटी मार्केट पर भी दिखाई दिया और शुरुआती कारोबार में खरीदार सक्रिय नजर आए।

सोने और चांदी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल से काफी प्रभावित होने वाली संपत्तियों में माना जाता है। अमेरिकी मुद्रा कमजोर होने पर आमतौर पर दूसरे देशों की मुद्राओं में सोना खरीदना तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाता है। इससे कीमती धातुओं की मांग को समर्थन मिल सकता है। गुरुवार सुबह डॉलर में कमजोरी का असर सोने के भाव पर भी दिखाई दिया।

इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी सोने के लिए सकारात्मक माहौल बनाया। सोना स्वयं ब्याज या निश्चित रिटर्न देने वाली संपत्ति नहीं है। ऐसे में जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसके विपरीत यील्ड में गिरावट आने पर सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।

MCX पर सुबह के कारोबार में सोने के साथ चांदी में भी तेजी दर्ज की गई। दोनों धातुओं में करीब एक प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने बाजार में सकारात्मक रुझान दिखाया। हालांकि कमोडिटी बाजार में कीमतें दिनभर अंतरराष्ट्रीय संकेतों, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की खरीद-बिक्री के आधार पर तेजी से बदल सकती हैं।

सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेत भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के रुख पर वैश्विक निवेशकों की लगातार नजर रहती है। यदि बाजार में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत होती है तो इसका फायदा आमतौर पर सोने को मिल सकता है। वहीं दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना डॉलर और बॉन्ड यील्ड को मजबूत कर सकती है, जिससे सोने पर दबाव पड़ सकता है।

भारतीय बाजार में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर का भी असर सोने-चांदी के भाव पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव के साथ रुपये की चाल घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है।

चांदी की कीमतों पर निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग का भी बड़ा प्रभाव रहता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और कई औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि इसकी कीमतों पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक मांग से जुड़े संकेतों का भी असर पड़ता है।

हाल के वर्षों में सोना निवेशकों के लिए महंगाई, आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक तनाव के दौरान सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चर्चा में रहा है। जब वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशकों का एक हिस्सा सोने की ओर रुख करता है। इसे सुरक्षित निवेश यानी सेफ हेवन एसेट के रूप में देखा जाता है।

हालांकि सोने की कीमतों में तेजी का मतलब यह नहीं है कि भाव लगातार एक ही दिशा में आगे बढ़ेंगे। कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझना महत्वपूर्ण है। डॉलर में अचानक मजबूती, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि या वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव से कीमतों पर दबाव भी आ सकता है।

गुरुवार सुबह की तेजी के पीछे डॉलर और बॉन्ड यील्ड की कमजोरी प्रमुख वजहों में रही। यदि डॉलर पर दबाव बना रहता है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड निचले स्तर पर रहती है तो सोने को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेतों पर भी बनी रहेगी।

घरेलू स्तर पर त्योहारी और शादी-विवाह के सीजन के दौरान सोने की भौतिक मांग भी कीमतों के लिए महत्वपूर्ण होती है। भारत में आभूषणों के रूप में सोने की बड़ी मांग रहती है। कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का असर ज्वेलरी बाजार की खरीदारी पर भी दिखाई देता है।

सोने की कीमत बढ़ने पर आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों का बजट प्रभावित हो सकता है। वहीं निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोग कीमतों की दिशा और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं। इसी तरह चांदी की कीमतों में बदलाव का असर आभूषणों के साथ औद्योगिक उपयोग पर भी पड़ सकता है।

कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की चाल पर कई कारक एक साथ काम करते हैं। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों की उम्मीद, वैश्विक आर्थिक स्थिति, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और निवेश मांग इनमें प्रमुख हैं। यही वजह है कि कीमती धातुओं की कीमतों में कभी-कभी एक ही कारोबारी सत्र में तेज बदलाव देखने को मिलता है।

गुरुवार 3 सितंबर की सुबह MCX पर दोनों कीमती धातुओं में आई तेजी ने एक बार फिर डॉलर और बॉन्ड बाजार के साथ सोने-चांदी के मजबूत संबंध को सामने रखा है। डॉलर और यील्ड की कमजोरी से निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की तरफ बढ़ा और शुरुआती सौदों में कीमतों को मजबूती मिली।

बाजार की नजर अब इस बात पर रहेगी कि शुरुआती कारोबार में मिली यह बढ़त दिन के अगले सत्रों में कायम रहती है या मुनाफावसूली के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है। वैश्विक बाजार से मिलने वाले नए संकेत सोने और चांदी की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

फिलहाल गुरुवार की शुरुआत सोना-चांदी खरीदने वाले निवेशकों के लिए तेजी के साथ हुई है। MCX पर शुरुआती कारोबार में करीब 1 प्रतिशत तक की बढ़त और डॉलर तथा बॉन्ड यील्ड में नरमी ने कीमती धातुओं को मजबूत आधार दिया है।

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