Income tax की इन 5 तारीखों को भूलना पड़ सकता है महंगा
समय रहते करें तैयारी
Business बिजनेस : आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने से जुड़ी महत्वपूर्ण समय-सीमाएं तय की हैं। नौकरीपेशा, पेंशनभोगी, कारोबारी और अन्य करदाताओं के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में अलग डेडलाइन लागू होती हैं। समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर जुर्माना, ब्याज और अन्य वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।कर विशेषज्ञों सीए अजय बगड़िया, सीए अभिनंदन पांडेय और सीए संतोष मिश्रा के अनुसार, अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उन लोगों के लिए जिनकी आय का स्रोत वेतन, पेंशन या पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) है,
31 जुलाई 2026
सबसे महत्वपूर्ण तारीख है। इस तिथि तक ITR दाखिल नहीं करने पर नियमानुसार विलंब शुल्क और बकाया कर पर ब्याज देना पड़ सकता है। साथ ही, शेयर बाजार या संपत्ति की बिक्री में हुए योग्य घाटे को भविष्य के लाभ से समायोजित (सेट-ऑफ) करने का लाभ भी प्रभावित हो सकता है।कुछ मामलों में, यदि सरकार या आयकर विभाग की ओर से समय-सीमा बढ़ाई जाती है, तो संशोधित अंतिम तिथि लागू हो सकती है। ऐसी स्थिति में करदाताओं को विभाग की आधिकारिक घोषणा पर नजर रखनी चाहिए।इसके अलावा,
31 अक्टूबर 2026
आमतौर पर उन करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है, जिनके खातों का ऑडिट आवश्यक होता है। वहीं,
31 दिसंबर 2026
तक संशोधित (Revised) या विलंबित (Belated) ITR दाखिल करने का अवसर मिल सकता है, यदि संबंधित नियमों के तहत पात्रता बनी रहती है।
31 मार्च 2027
वित्त वर्ष 2025-26 से जुड़े कुछ कर मामलों और अनुपालनों (Compliances) के लिए अंतिम सीमा हो सकती है। हालांकि, किस करदाता पर कौन-सी समय-सीमा लागू होगी, यह उसकी आय के स्रोत, ऑडिट की आवश्यकता और कर नियमों पर निर्भर करता है।विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट, निवेश और कर कटौती से जुड़े रिकॉर्ड तैयार कर लेने चाहिए। समय पर ITR दाखिल करने से रिफंड मिलने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है और भविष्य में किसी तरह की कानूनी या वित्तीय परेशानी से बचा जा सकता है।