Business: देश की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी Rajesh Exports एक बार फिर जांच के घेरे में आ गई है। कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु में मंगलवार को छापेमारी की। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी की वित्तीय प्रक्रियाओं और अकाउंटिंग पर गंभीर सवाल उठाए थे।
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की टीम सुबह से ही कंपनी से जुड़े परिसरों में दस्तावेजों की जांच कर रही है। एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और फंड फ्लो से जुड़े कागजातों की गहन पड़ताल कर रही है। हालांकि, अभी तक ED की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई SEBI की रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाई गई है।
SEBI ने अपने अंतरिम आदेश में Rajesh Exports और इसके चेयरमैन राजेश मेहता सहित कुछ संबंधित संस्थाओं पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने कई संबंधित संस्थाओं के माध्यम से जटिल लेनदेन किए, जिससे वास्तविक फंड ट्रेल को समझना मुश्किल हो गया। SEBI के अनुसार, इन लेनदेन का ढांचा ऐसा था कि पैसों के स्रोत और उपयोग को छिपाने की कोशिश की गई।
नियामक ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी आवश्यक दस्तावेज जैसे लोन एग्रीमेंट, बोर्ड अप्रूवल और अन्य रिकॉर्ड पेश करने में असफल रही। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2020 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने प्रमोटर राजेश मेहता को लगभग 338.90 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि वापस केवल 232.44 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि SEBI ने कंपनी के वित्तीय विवरणों में लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की कथित गलत बयानी का उल्लेख किया। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया कि यह आंकड़ा वास्तविक नकदी प्रवाह नहीं, बल्कि कथित रूप से गलत अकाउंटिंग एंट्रीज का कुल योग है, जिससे राजस्व और खरीद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।
इन आरोपों के बाद बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के गंभीर वित्तीय आरोप किसी भी लिस्टेड कंपनी की साख और निवेशकों के भरोसे पर बड़ा असर डाल सकते हैं। Rajesh Exports भारतीय ज्वेलरी और गोल्ड एक्सपोर्ट सेक्टर की एक बड़ी कंपनी रही है, इसलिए इस मामले पर बाजार की नजर बनी हुई है।
ED की एंट्री के बाद अब जांच और गहरी होने की संभावना है। यदि मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य वित्तीय अपराध से जुड़े सबूत मिलते हैं, तो कंपनी और उसके प्रमोटर्स की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल निवेशक और बाजार दोनों ही आगे की जांच और आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहे हैं।