नई दिल्ली: चीनी आयात के सरकारी फैसले का असर शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया है। चीनी कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने शुगर सेक्टर के शेयरों में बिकवाली की, जिसके चलते कई प्रमुख चीनी कंपनियों के स्टॉक दबाव में आ गए।

केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। यह फैसला करीब एक दशक बाद लिया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य त्योहारों के सीजन से पहले बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना है।
इस फैसले के बाद निवेशकों को आशंका है कि घरेलू चीनी उत्पादक कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। आयातित चीनी की उपलब्धता बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव आ सकता है, जिससे चीनी मिलों की कमाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है।
शेयर बाजार में डालमिया भारत शुगर, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज और बलरामपुर चीनी मिल्स जैसे प्रमुख शुगर स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार, डालमिया भारत शुगर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि अन्य चीनी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
क्यों गिर रहे हैं शुगर स्टॉक्स?
शेयर बाजार में किसी कंपनी के स्टॉक की कीमत भविष्य की कमाई की उम्मीदों पर भी निर्भर करती है। चीनी आयात के फैसले के बाद निवेशकों को डर है कि घरेलू चीनी कंपनियों को बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा सरकार का यह कदम संकेत देता है कि वह चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकती है। इससे कंपनियों की कीमत निर्धारण क्षमता और मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार ने क्यों लिया आयात का फैसला?
हाल के समय में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई थी। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार ने सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया। इसके तहत 31 अक्टूबर तक कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी गई है।
सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं को राहत देना और चीनी की कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है। इसके साथ ही थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा जैसे कदम भी उठाए गए हैं, ताकि जमाखोरी पर नियंत्रण रखा जा सके।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
शुगर सेक्टर में निवेश करने वाले लोगों की नजर अब इस बात पर है कि आयात का असर कंपनियों के कारोबार और आने वाली तिमाहियों के नतीजों पर कितना पड़ता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में चीनी उद्योग की स्थिति उत्पादन, कीमतों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगी।
भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में सरकार के नीतिगत फैसले इस सेक्टर के शेयरों पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
फिलहाल चीनी आयात के फैसले से शुगर स्टॉक्स में दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर चीनी कीमतों, आयात की गति और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर रहेगी।
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