विदेश में छिपी काली कमाई पर शिकंजा, 16 देशों को ट्रेनिंग देगी CBI
CBI ने शुरू किया बड़ा अभियान
नई दिल्ली: भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों के जरिए कमाई गई अवैध संपत्ति को विदेशों में छिपाने वालों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच क्षमता मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महत्वपूर्ण पहल की है। अब सीबीआई 16 देशों के अधिकारियों को वित्तीय अपराधों की जांच, संदिग्ध लेनदेन का पता लगाने और विदेशों में छिपाई गई अवैध संपत्तियों की पहचान करने का विशेष प्रशिक्षण दे रही है। इस पहल का उद्देश्य भ्रष्टाचार से अर्जित धन के नेटवर्क का खुलासा करना और अवैध संपत्तियों की बरामदगी के लिए विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित सीबीआई अकादमी में 4 नवंबर 2026 से एक सप्ताह का विशेष अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। इसमें 16 देशों के कुल 24 अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सीबीआई अकादमी के निदेशक सुहैल शर्मा ने किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोत्सवाना, इथियोपिया, घाना, इराक, लेबनान, मेडागास्कर, मालदीव, माली, मॉरीशस, म्यांमार, नामीबिया, नाइजीरिया, पनामा, पराग्वे, तंजानिया और जिम्बाब्वे के अधिकारी शामिल हैं। इन देशों के अधिकारियों को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के आधुनिक तरीकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाएगा। आर्थिक अपराधों का स्वरूप लगातार जटिल होता जा रहा है। भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से अर्जित धन को छिपाने के लिए अपराधी कई बार विभिन्न देशों के बैंक खातों, कंपनियों और निवेश के माध्यम से रकम का लेनदेन करते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना होता है कि पैसा कहां से आया, किन खातों से होकर गुजरा और आखिर में किस व्यक्ति या संस्था तक पहुंचा।
इसी प्रक्रिया को 'मनी ट्रेल' कहा जाता है। इसके माध्यम से जांच अधिकारी वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी की पहचान करने का प्रयास करते हैं। जब मामला एक से अधिक देशों से जुड़ा होता है, तब जांच और मुश्किल हो जाती है। अलग-अलग देशों के कानून, बैंकिंग नियम और सूचनाएं साझा करने की प्रक्रियाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सीबीआई के इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पहचान, बैंकिंग रिकॉर्ड के विश्लेषण, भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति का पता लगाने तथा अवैध धन के प्रवाह की जांच से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा संपत्तियों को कुर्क करने, जब्त करने और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से उनकी बरामदगी से संबंधित पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान सीबीआई अकादमी के निदेशक सुहैल शर्मा ने भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने और उनकी बरामदगी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्थिक अपराधों की प्रभावी जांच के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में केवल आरोपी की गिरफ्तारी या उसके खिलाफ मुकदमा चलाना ही पर्याप्त नहीं होता। अपराध के जरिए अर्जित संपत्ति का पता लगाना और कानून के अनुसार उसकी बरामदगी करना भी जरूरी है। यदि अवैध धन दूसरे देश में पहुंच चुका है, तो उसकी पहचान और वापसी के लिए संबंधित देशों की जांच एजेंसियों का सहयोग आवश्यक हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों की जांच में दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारियों का विश्लेषण महत्वपूर्ण होता है। कई मामलों में कंपनियों के जटिल स्वामित्व ढांचे और अलग-अलग खातों के बीच लेनदेन के कारण वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना कठिन हो सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सीबीआई की यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के साथ भारत के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम को भी मजबूती दे सकती है। आईटीईसी योजना के माध्यम से भारत विभिन्न विकासशील देशों के अधिकारियों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान करता है। कानूनी प्रक्रियाओं और प्रभावी तरीकों को साझा करने का अवसर मिलता है।
इस प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें अलग-अलग देशों के अधिकारी एक मंच पर अपनी चुनौतियों और अनुभवों पर चर्चा कर सकेंगे। इससे भविष्य में भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से संबंधित मामलों में आपसी सहयोग बेहतर होने की संभावना है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से अधिकारियों के कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया है। इससे किसी विशेष मामले में अवैध संपत्ति की तत्काल बरामदगी की पुष्टि नहीं होती। सीबीआई का यह अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अधिकारियों को विदेशों में छिपाई गई अवैध संपत्तियों का पता लगाने, वित्तीय अपराधों की जांच करने और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए संपत्तियों की बरामदगी में बेहतर दक्षता हासिल करने में मदद मिल सकती है।