बिज़नेस :  दिवाली से पहले आम जनता को महंगाई का एक और झटका लगा है। देश की प्रमुख डेयरी उत्पाद कंपनी अमूल ने अपने घी और मक्खन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी के एक किलोग्राम घी के पैक की कीमत में सीधे 50 रुपये का इजाफा हुआ है। वहीं, 500 ग्राम मक्खन का पैक 15 रुपये महंगा हो गया है। त्योहारी सीजन में हुई इस बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासकर उन परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है, जो दिवाली पर मिठाइयां और पारंपरिक पकवान बनाने के लिए बड़ी मात्रा में घी और मक्खन खरीदते हैं।

अमूल के उत्पादों की मांग देशभर में रहती है। कंपनी का घी और मक्खन घरों से लेकर होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और बेकरी तक इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल घरेलू ग्राहकों तक सीमित नहीं रह सकता।
कितना महंगा हुआ अमूल का घी और मक्खन?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमूल के एक किलोग्राम घी के पैक की कीमत पहले 630 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 680 रुपये कर दिया गया है। यानी ग्राहकों को अब एक किलो घी खरीदने के लिए 50 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
वहीं, अमूल के 500 ग्राम मक्खन की कीमत 310 रुपये से बढ़कर 325 रुपये हो गई है। इस पैक पर 15 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
नई कीमतों को इस तरह समझ सकते हैं:
उत्पाद पुरानी कीमत नई कीमत बढ़ोतरी
अमूल घी (1 किलो) ₹630 ₹680 ₹50
अमूल मक्खन (500 ग्राम) ₹310 ₹325 ₹15
ये रिपोर्ट की गई कीमतें संबंधित पैक के लिए हैं। अलग-अलग प्रकार के घी, पैकिंग और बिक्री स्थान के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।
त्योहारी सीजन में ग्राहकों की जेब पर असर
दिवाली के अवसर पर घी की मांग आम दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। घरों में लड्डू, हलवा, बर्फी, गुझिया और कई अन्य पारंपरिक मिठाइयां तैयार की जाती हैं। इसके अलावा पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों में भी घी का इस्तेमाल होता है।ऐसे समय में घी की कीमत बढ़ने से उपभोक्ताओं के खर्च में इजाफा होना स्वाभाविक है। यदि कोई परिवार दिवाली की तैयारियों के लिए पांच किलोग्राम घी खरीदता है, तो नई कीमत के हिसाब से उसे पहले की तुलना में 250 रुपये अधिक खर्च करने होंगे।इसी तरह मक्खन का इस्तेमाल नाश्ते, बेकरी उत्पादों, केक, कुकीज और विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है। इसकी कीमत बढ़ने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ व्यावसायिक खरीदारों का खर्च भी बढ़ सकता है।
क्यों बढ़ाए गए घी और मक्खन के दाम?
मीडिया रिपोर्ट्स में कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग और कुछ बाजारों में घी की उपलब्धता प्रभावित होने को प्रमुख कारणों में गिनाया गया है।खासकर अमूल के गाय के घी की आपूर्ति को लेकर कुछ बाजारों में कमी की खबरें सामने आई हैं। मांग बढ़ने और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं होने से बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है।इसके अलावा गुजरात और राजस्थान में मिलावटी घी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद ब्रांडेड उत्पादों की मांग बढ़ने की बात भी रिपोर्ट्स में सामने आई है। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के लिए कंपनी की ओर से घोषित विस्तृत लागत संबंधी कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ बाजारों में घी की किल्लत की खबरें
कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अमूल घी की उपलब्धता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ शहरों में उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का घी खरीदने में परेशानी होने की खबरें मिली हैं।ऐसी स्थिति में ग्राहकों को अलग-अलग दुकानों पर उत्पाद तलाशना पड़ सकता है। हालांकि, किसी क्षेत्र में अस्थायी कमी का अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में घी का स्टॉक समाप्त हो गया है।दुकानों पर उत्पादों की उपलब्धता स्थानीय आपूर्ति, वितरकों के स्टॉक और ग्राहकों की मांग पर निर्भर करती है। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले नजदीकी अधिकृत विक्रेता से उपलब्धता और कीमत की जानकारी लेनी चाहिए।
जीएसटी में कटौती के बाद अब कीमतों में बढ़ोतरी
सितंबर 2025 में डेयरी उत्पादों पर जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया था। उस समय कई उत्पादों पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई थी।अमूल ने भी जीएसटी में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए अपने अनेक उत्पादों की कीमतें कम की थीं। अब घी और मक्खन के दाम बढ़ने से कुछ उत्पादों पर ग्राहकों को मिला पिछला मूल्य लाभ कम हो गया है।हालांकि, कर में कटौती और मौजूदा मूल्य वृद्धि अलग-अलग घटनाएं हैं। किसी उत्पाद की अंतिम कीमत पर कच्चे माल, उत्पादन, परिवहन, पैकेजिंग और बाजार में मांग जैसे कई कारकों का असर पड़ सकता है।
मिठाई कारोबारियों पर भी पड़ सकता है प्रभाव
दिवाली के मौके पर मिठाई की दुकानों में घी की खपत बढ़ जाती है। विशेष रूप से शुद्ध घी से तैयार मिठाइयों की मांग अधिक रहती है।ऐसे में ब्रांडेड घी की कीमत बढ़ने से मिठाई कारोबारियों की उत्पादन लागत प्रभावित हो सकती है। हालांकि, मिठाइयों की खुदरा कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह दुकानदारों की लागत और मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा।
बेकरी व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों के लिए मक्खन महत्वपूर्ण सामग्री है। केक, पेस्ट्री, बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पाद तैयार करने में मक्खन का इस्तेमाल होता है। इसलिए 500 ग्राम मक्खन की कीमत में 15 रुपये की बढ़ोतरी व्यावसायिक खरीदारों के लिए भी मायने रखती है।
खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
ग्राहकों को घी और मक्खन खरीदते समय पैकिंग पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी जरूर देखना चाहिए। पुराने और नए स्टॉक की पैकिंग पर अलग-अलग कीमतें दर्ज हो सकती हैं।इसके अलावा उत्पाद की एक्सपायरी डेट, पैकेजिंग की स्थिति और विक्रेता की विश्वसनीयता की जांच करना भी जरूरी है।
प्लेटफॉर्म पर छूट मिलने की स्थिति में कीमतों की तुलना की जा सकती है। हालांकि, केवल सस्ता उत्पाद देखकर खरीदारी करने के बजाय उसकी गुणवत्ता और प्रामाणिकता को प्राथमिकता देना चाहिए।
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