Business:भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग ऐप्स और वेबसाइट्स में ग्राहकों को भ्रमित करने वाले “डार्क पैटर्न” पर सख्त कदम उठाया है। आरबीआई ने ऐसे 11 तरीकों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल बैंक या उनके एजेंट अब नहीं कर पाएंगे। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
क्या होते हैं डार्क पैटर्न
डार्क पैटर्न ऐसे डिजाइन होते हैं, जिनसे यूजर को बिना इच्छा के किसी सर्विस जैसे लोन या इंश्योरेंस की ओर मोड़ा जाता है। कई बार पॉप-अप बंद करने पर भी ग्राहक लोन पेज पर पहुंच जाते हैं या अनजाने में कोई प्रोडक्ट खरीद लेते हैं। आरबीआई ने इसे ग्राहक अधिकारों का उल्लंघन माना है।
बैन किए गए 11 तरीके
आरबीआई ने जिन प्रमुख तरीकों पर रोक लगाई है, उनमें झूठी जल्दबाजी दिखाना, बिना अनुमति प्री-टिक्ड इंश्योरेंस जोड़ना, मना करने पर शर्मिंदा करने वाली भाषा, जबरन पॉप-अप रीडायरेक्शन, सब्सक्रिप्शन को मुश्किल बनाना और इंटरफेस में पक्षपात शामिल हैं। इसके अलावा झांसा देना, छिपे चार्ज दिखाना, नकली विज्ञापन, बार-बार परेशान करना और कन्फ्यूजिंग भाषा भी प्रतिबंधित की गई है।
ग्राहकों के साथ पारदर्शिता जरूरी
आरबीआई के अनुसार अब बैंकिंग ऐप्स को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाना होगा। किसी भी सर्विस को लेना या बंद करना उतना ही आसान होना चाहिए।
नियमों का पालन अनिवार्य
सभी बैंकों और उनके एजेंट्स को 2027 से पहले अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का ऑडिट कर इन कमियों को हटाना होगा। इसके साथ ही उपभोक्ता संरक्षण नियमों का पालन भी जरूरी होगा।
शिकायत की व्यवस्था
अगर किसी ग्राहक को डार्क पैटर्न की समस्या होती है तो वह पहले बैंक के शिकायत अधिकारी से संपर्क कर सकता है। समाधान न मिलने पर 30 दिन बाद मामला आरबीआई ओम्बुड्समैन तक ले जाया जा सकता है।