बिजनेस : देश में घरेलू गैस व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG को बढ़ावा देने की सरकारी योजना की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसका असर LPG सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों पर पड़ेगा। सरकार ने लंबे समय से PNG को एक सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक इसकी पहुंच नहीं बढ़ पाई है।
PNG और LPG दोनों का इस्तेमाल घरों में खाना पकाने के लिए किया जाता है। जहां LPG सिलेंडर देश के ज्यादातर हिस्सों में आसानी से उपलब्ध है, वहीं PNG की सुविधा केवल उन इलाकों में मिलती है जहां पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया गया है। यही वजह है कि बड़े शहरों के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर PNG अभी भी आम लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है।
PNG को बढ़ावा देने की योजना क्यों धीमी हुई
सरकार ने प्राकृतिक गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए PNG नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य था कि ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाई जाए, जिससे सिलेंडर की निर्भरता कम हो सके।
लेकिन PNG नेटवर्क बिछाने में कई चुनौतियां सामने आईं। पाइपलाइन बिछाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश, सड़क खुदाई, स्थानीय अनुमति और शहरी क्षेत्रों में जगह की समस्या जैसी बाधाओं के कारण इसका विस्तार अपेक्षाकृत धीमा रहा।
कई छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में PNG पहुंचाना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। यही कारण है कि LPG सिलेंडर आज भी देश के करोड़ों परिवारों की मुख्य रसोई गैस बना हुआ है।
LPG ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है
PNG अभियान की धीमी रफ्तार का सीधा मतलब यह नहीं है कि LPG सिलेंडर ग्राहकों पर तुरंत कोई बड़ा बोझ पड़ जाएगा। लेकिन लंबे समय में ऊर्जा नीति और गैस की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
अगर PNG का विस्तार सीमित रहता है तो LPG की मांग बनी रहेगी। ज्यादा मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में बदलाव का असर घरेलू गैस कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि LPG की कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं, जिनमें कच्चे तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, सरकार की सब्सिडी नीति और बाजार की स्थिति शामिल हैं।
सरकार का फोकस प्राकृतिक गैस पर
भारत सरकार प्राकृतिक गैस को ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना और प्रदूषण कम करना है।
PNG और CNG इसी नीति का हिस्सा हैं। CNG का इस्तेमाल वाहनों में बढ़ रहा है, जबकि PNG को घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।
LPG अभी भी सबसे बड़ा विकल्प
देश में उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों गरीब परिवारों को LPG कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम हुई।
आज भी गांवों और छोटे शहरों में LPG सिलेंडर सबसे व्यावहारिक विकल्प है, क्योंकि इसे आसानी से पहुंचाया जा सकता है। वहीं PNG के लिए स्थायी पाइपलाइन नेटवर्क की जरूरत होती है।
ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए
LPG ग्राहकों को गैस की कीमतों में बदलाव, सब्सिडी नियमों और सरकार की योजनाओं पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही गैस की बचत करना भी जरूरी है, क्योंकि इससे खर्च कम किया जा सकता है।
रसोई में गैस का सही इस्तेमाल, समय-समय पर चूल्हे की जांच और लीकेज से बचाव जैसे उपाय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
भविष्य में क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में LPG और PNG दोनों की अपनी भूमिका बनी रहेगी। शहरों में जहां पाइपलाइन नेटवर्क मजबूत होगा, वहां PNG का इस्तेमाल बढ़ सकता है। वहीं ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में LPG लंबे समय तक प्रमुख ईंधन बना रहेगा।
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोगों को सस्ती, सुरक्षित और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए। PNG का विस्तार बढ़ाने के साथ-साथ LPG व्यवस्था को भी मजबूत बनाए रखना जरूरी होगा।
फिलहाल PNG अभियान की धीमी गति के बावजूद LPG सिलेंडर ग्राहकों के लिए तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले बदलावों का असर आने वाले समय में गैस बाजार और उपभोक्ताओं की जेब पर जरूर पड़ सकता है।
Tags: