नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की औद्योगिक और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सरकार ने भारत में महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसके अलावा बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति मिली है। इन फैसलों का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को मजबूत करना, स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करना है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
केंद्र सरकार के इन फैसलों को भारत की ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, सौर ऊर्जा, रक्षा उपकरणों और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर सौर और पवन ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण बिजली को संग्रहित करने की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक हो गया है।
क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग के लिए 2,814 करोड़ रुपये मंजूर
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय सहायता योजना को मंजूरी दी है।इस योजना का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण में निवेश को प्रोत्साहित करना है। भारत में कई उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों को कच्चे रूप में प्राप्त करने के बाद उनकी प्रोसेसिंग और शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है।लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ पृथ्वी तत्व जैसे महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक तकनीकी उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं।इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रक्षा क्षेत्र में होता है।घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होने से भारतीय कंपनियों को महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए विदेशी प्रसंस्करण केंद्रों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम
महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति कुछ देशों और कंपनियों में केंद्रित है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुकावट या भू-राजनीतिक तनाव के कारण इनकी उपलब्धता और कीमत प्रभावित हो सकती है।भारत सरकार लंबे समय से इन खनिजों की सुरक्षित और स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य खनिजों की खोज, खनन, प्रोसेसिंग और पुनर्चक्रण से जुड़ी पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।अब नई पूंजीगत सहायता योजना के माध्यम से घरेलू प्रसंस्करण सुविधाओं में निवेश बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।इससे महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने और औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
ऊर्जा भंडारण के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 14,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।इस योजना के तहत देश में बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।सरकार ने 92 गीगावाट-घंटा की नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।योजना के तहत वायबिलिटी गैप फंडिंग यानी वीजीएफ के माध्यम से परियोजनाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी।वायबिलिटी गैप फंडिंग का उपयोग ऐसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए किया जाता है, जिनकी स्थापना में भारी निवेश की आवश्यकता होती है और जिन्हें शुरुआती चरण में वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल में मिलेगी मदद
भारत में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इन दोनों स्रोतों से बिजली का उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।सौर ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से दिन में होता है, जबकि पवन ऊर्जा की उपलब्धता हवा की गति के अनुसार बदलती रहती है।ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।इन प्रणालियों के माध्यम से अतिरिक्त बिजली को संग्रहित किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, दिन में सौर ऊर्जा से पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को बैटरी में संग्रहित करके शाम और रात के समय उपयोग किया जा सकता है।इससे बिजली ग्रिड पर दबाव कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका
देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिक विकास, शहरीकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीकों के कारण भविष्य में बिजली की खपत में और वृद्धि होने की संभावना है।इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। ऊर्जा भंडारण और बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2031-32 तक भारत को बड़ी मात्रा में बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी।सरकार के पहले जारी आकलन में वर्ष 2031-32 तक लगभग 236 गीगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता की जरूरत का अनुमान लगाया गया था।
नई योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग को मिल सकता है फायदा
क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग और ऊर्जा भंडारण से जुड़े दोनों फैसलों का संबंध इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग से भी है।इलेक्ट्रिक कारों, बसों और अन्य वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के निर्माण के लिए कई महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत होती है।यदि भारत में इन खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ती है, तो घरेलू बैटरी निर्माताओं को कच्चे माल की आपूर्ति बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।इसके अलावा ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विस्तार से बैटरी निर्माण और उससे जुड़ी तकनीकों की मांग भी बढ़ सकती है।इससे विनिर्माण क्षेत्र में निवेश, अनुसंधान और नई औद्योगिक सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र के लिए भारत-VISTAAR पहल भी महत्वपूर्ण
केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है।भारत-VISTAAR एक बहुभाषी, एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे किसानों को कृषि संबंधी जानकारी और सलाह उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है।इसका उद्देश्य किसानों को मौसम, फसलों की देखभाल, कीट नियंत्रण, बाजार भाव और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी एकीकृत माध्यम से उपलब्ध कराना है।इस प्लेटफॉर्म की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी और इसके लिए 150 करोड़ रुपये का आवंटन बताया गया था।सरकारी जानकारी के अनुसार, भारत-VISTAAR का प्रारंभिक संस्करण पहले ही शुरू किया जा चुका है। हालांकि, 4 नवंबर की कैबिनेट बैठक में इसके लिए किसी नई स्वीकृति की राशि या विस्तृत शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हुई है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती
केंद्र सरकार के इन फैसलों को आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है।महत्वपूर्ण खनिजों का घरेलू प्रसंस्करण बढ़ने से भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर स्थान हासिल करने में मदद मिल सकती है।वहीं, ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ने से सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने का रास्ता खुलेगा।इन परियोजनाओं के विकास से संबंधित क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। हालांकि, रोजगार और निवेश के वास्तविक आंकड़े परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास को गति देने की तैयारी
भारत वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण क्षमता का विकास आवश्यक माना जाता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए फैसलों से देश में महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग और ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।अब इन योजनाओं की सफलता परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन, निजी और सार्वजनिक निवेश तथा विकसित होने वाली वास्तविक उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग के लिए 2,814 करोड़ रुपये और ऊर्जा भंडारण के लिए 14,500 करोड़ रुपये की मंजूरी भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।