नई दिल्ली। टाटा समूह ने एक बार फिर भारतीय ब्रांड जगत में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। ब्रांड फाइनेंस की 'इंडिया 100 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप लगातार 18वें साल भारत का सबसे मूल्यवान ब्रांड बना हुआ है। समूह की ब्रांड वैल्यू बढ़कर 33.6 अरब डॉलर पहुंच गई है, जिससे उसने देश के सबसे भरोसेमंद और मजबूत ब्रांड के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टॉप 100 सबसे मूल्यवान ब्रांडों की कुल ब्रांड वैल्यू में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 252.8 अरब डॉलर हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय कंपनियों के ब्रांड मूल्य में यह वृद्धि देश के कॉर्पोरेट सेक्टर की मजबूती को दर्शाती है।
टाटा की रणनीति ने बढ़ाई ताकत
टाटा समूह ने अपनी ब्रांड वैल्यू बढ़ाने के लिए कई नए क्षेत्रों में निवेश किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर में समूह की सक्रियता ने उसकी बाजार स्थिति को और मजबूत किया है। टाटा की पहचान लंबे समय से भरोसे, गुणवत्ता और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी रही है। ऑटोमोबाइल से लेकर आईटी, स्टील, एयरलाइंस, होटल और उपभोक्ता उत्पादों तक समूह की मौजूदगी ने इसे देश के सबसे व्यापक कारोबारी नेटवर्क में शामिल किया है।
अदाणी ग्रुप की पहली बार टॉप 10 में एंट्री
रिपोर्ट की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि अदाणी ग्रुप पहली बार भारत के टॉप 10 सबसे मूल्यवान ब्रांडों में शामिल हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में विस्तार के चलते अदाणी समूह की ब्रांड पहचान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सुजलॉन एनर्जी को भारत का सबसे तेज गति से बढ़ने वाला ब्रांड बताया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग और कंपनी की मजबूत स्थिति ने उसकी ब्रांड वैल्यू को तेजी से बढ़ाने में मदद की है।
भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक पहचान
ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय कंपनियां अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं। टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और डिजिटल सेक्टर में निवेश के कारण भारतीय ब्रांडों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
टाटा समूह का लगातार 18 साल तक नंबर-1 बने रहना इस बात का संकेत है कि भरोसे और मजबूत कारोबारी रणनीति के दम पर भारतीय कंपनियां लंबे समय तक अपनी स्थिति कायम रख सकती हैं।