बिजनेस : भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और निवेशकों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि क्या सेंसेक्स और निफ्टी अब वापसी करेंगे या गिरावट का दौर आगे भी जारी रहेगा। बाजार की दिशा अब कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।
पिछले हफ्ते भारतीय बाजारों में दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि आखिरी कारोबारी सत्र में बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन निवेशकों की सतर्कता अभी भी बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह बाजार में तेजी की वापसी के लिए मजबूत ट्रिगर की जरूरत होगी। वहीं अगर वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत मिले या विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही तो दबाव बढ़ सकता है।
निफ्टी की चाल पर रहेगी नजर
तकनीकी स्तर पर निफ्टी फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ऊपर की तरफ 24,300 से 24,700 के बीच मजबूत बाधाएं बनी हुई हैं।
अगर निफ्टी इस सपोर्ट को बनाए रखने में सफल रहता है तो बाजार में खरीदारी लौट सकती है। वहीं सपोर्ट टूटने पर निवेशकों में डर बढ़ सकता है और बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।
1. GDP आंकड़े देंगे बाजार को दिशा
इस सप्ताह भारत के आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़ों पर निवेशकों की नजर रहेगी। देश की GDP ग्रोथ रिपोर्ट बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
अगर आर्थिक विकास के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में भरोसा बढ़ सकता है। वहीं कमजोर आंकड़े आने पर निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।
GDP आंकड़े यह संकेत देंगे कि देश की अर्थव्यवस्था किस रफ्तार से आगे बढ़ रही है और कंपनियों की कमाई पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
2. विदेशी निवेशकों की चाल होगी अहम
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है।
अगर विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार में खरीदारी शुरू करते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं लगातार बिकवाली जारी रहने पर तेजी की राह मुश्किल हो सकती है।
इसके अलावा घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी भी बाजार को सहारा दे सकती है।
3. अमेरिकी बाजार और फेडरल रिजर्व के फैसले
भारतीय बाजार पर अमेरिकी बाजारों का सीधा असर पड़ता है। अमेरिका में रोजगार आंकड़े, महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संकेत बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
अगर अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दरों में राहत के संकेत मिलते हैं तो दुनियाभर के शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल बन सकता है। लेकिन अगर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख दिखा तो बाजारों में दबाव आ सकता है।
4. कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए हमेशा बड़ा फैक्टर रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आती है तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत होगी।
5. IT और बड़े शेयरों पर नजर
पिछले सप्ताह IT सेक्टर में मजबूती देखने को मिली। वैश्विक टेक कंपनियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश की उम्मीदों ने IT शेयरों को समर्थन दिया।
इसके अलावा बैंकिंग, ऑटो, फार्मा और ऊर्जा क्षेत्र के बड़े शेयरों की चाल भी बाजार की दिशा तय कर सकती है।
निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वाले निवेशकों को छोटी अवधि की गिरावट से घबराना नहीं चाहिए।
नए निवेशकों को एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए। वहीं ट्रेडर्स को महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
क्या बाजार में आएगी तेजी?
बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि तुरंत बड़ी तेजी की बजाय उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बाजार को ऊपर जाने के लिए वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेश और आर्थिक आंकड़ों से समर्थन की जरूरत होगी।
अगर घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत संकेत देती है और वैश्विक माहौल सकारात्मक रहता है तो बाजार वापसी कर सकता है। लेकिन कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच गिरावट का दबाव बना रह सकता है।
फिलहाल निवेशकों के लिए यह सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। GDP आंकड़े, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी बाजारों की चाल और कच्चे तेल की कीमतें यह तय करेंगी कि शेयर बाजार नई तेजी की ओर बढ़ता है या गिरावट का सिलसिला आगे जारी रहता है।