Business : शेयर बाजार में मुनाफे की उम्मीद लेकर बनाई गई रणनीति पर अमल में हुई चूक एक ट्रेडर को बेहद महंगी पड़ गई। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ में कारोबार करने वाले मयंक राज ने दावा किया है कि सुबह समय पर नहीं उठ पाने के कारण उन्हें करीब 61 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने नौ अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, पिछली शाम ली गई पोजीशन अगले दिन खुली हुई थी, लेकिन वह तय समय पर उसे संभाल नहीं सके। जब उनकी नींद खुली और उन्होंने ट्रेडिंग अकाउंट देखा, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका था।
मयंक ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले कॉल ऑप्शंस शॉर्ट किए थे। अगले दिन सुबह उनका इरादा पोजीशन पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तय नुकसान के स्तर पर बाहर निकलने का था। हालांकि, देर से उठने के कारण वह अपनी योजना लागू नहीं कर पाए। उन्होंने नुकसान की मुख्य वजह ट्रेड सेटअप के बजाय अनुशासन की कमी को बताया। उनका कहना था कि समय पर उठने की स्थिति में वह लगभग 15 से 20 लाख रुपये के निर्धारित नुकसान पर पोजीशन बंद कर देते। यह उनके आकलन पर आधारित दावा है; उस समय वास्तविक निकासी किस कीमत पर होती, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
साझा किए गए ट्रेडिंग विवरण के मुताबिक, 13 अक्टूबर की एक्सपायरी वाले निफ्टी 22,000 कॉल ऑप्शन की शॉर्ट पोजीशन में करीब 71 लाख रुपये का घाटा दिखा। उसी एक्सपायरी के निफ्टी 22,500 कॉल ऑप्शन की खरीद वाली पोजीशन से लगभग 10 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। दोनों का संयुक्त असर जोड़ने के बाद कुल नुकसान करीब 61 लाख रुपये रहा। इसलिए यह पूरा घाटा किसी एक लेनदेन का आंकड़ा नहीं था, बल्कि बताई गई दोनों पोजीशन के लाभ और नुकसान का परिणाम था। ये आंकड़े ट्रेडर की पोस्ट और उससे जुड़े स्क्रीनशॉट पर आधारित हैं।
इस घटना के बाद चर्चा केवल देर तक सोने पर नहीं, बल्कि खुली पोजीशन को संभालने की व्यवस्था पर भी होने लगी। मयंक की योजना में नुकसान की सीमा तय थी, लेकिन उनके विवरण के अनुसार उस सीमा पर निकासी उनके समय पर उपलब्ध होने पर निर्भर थी। यही अंतर इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नुकसान का स्तर पहले सोच लेना और उस स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करना दो अलग बातें हैं। ट्रेडर के अपने बयान से स्पष्ट है कि योजना बनाने के बावजूद वह उसके अनुसार समय पर बाहर नहीं निकल सके।
मयंक ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि पिछले सप्ताह उन्होंने अच्छा मुनाफा कमाया था। हालांकि, इस बड़े नुकसान ने अक्टूबर महीने के उनके कुल लाभ-हानि खाते को घाटे में पहुंचा दिया। उन्होंने आगे धीरे-धीरे नुकसान की भरपाई करने और अनुशासन बनाए रखने पर ध्यान देने की बात कही। महीने के अंत तक दोबारा मुनाफे में आने की उनकी इच्छा भी सामने आई। हालांकि, आगे की ट्रेडिंग से नुकसान की भरपाई होगी या नहीं, यह अभी निश्चित नहीं है। फिलहाल खबर का आधार उनका साझा किया गया अनुभव है।
सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने रातभर खुली रखी जाने वाली पोजीशन के जोखिम पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने अगले दिन निकासी के भरोसे लिए जाने वाले ट्रेड से बचने की सलाह दी। अन्य प्रतिक्रियाओं में पहले से जोखिम नियंत्रण की व्यवस्था रखने की बात कही गई। वहीं, कुछ यूजर्स ने उनके ट्रेड के चयन पर भी सवाल उठाए। ऐसे में यह कहना कि चार्ट या रणनीति में कोई गलती थी ही नहीं, प्रमाणित निष्कर्ष नहीं होगा। यह मुख्य रूप से ट्रेडर की अपनी व्याख्या है कि नुकसान अनुशासन की कमी से बढ़ा।
स्टॉप-लॉस की चर्चा में एक और अंतर समझना जरूरी है। मन में तय की गई नुकसान की सीमा अपने आप बाजार में आदेश नहीं बन जाती। एक्सचेंज की जानकारी के मुताबिक, स्टॉप-लॉस आदेश संबंधित सिक्योरिटी की कीमत के निर्धारित स्तर तक पहुंचने या उसे पार करने पर सक्रिय होता है। सक्रिय होने से पहले वह सामान्य रूप से बाजार में उपलब्ध आदेश की तरह काम नहीं करता। इसका उद्देश्य तय परिस्थितियों में निकासी की प्रक्रिया शुरू करना है। आदेश का प्रकार और उसकी शर्तें भी महत्वपूर्ण होती हैं।
हालांकि, स्टॉप-लॉस को नुकसान रोकने की पूर्ण गारंटी समझना भी सही नहीं है। एक्सचेंज के नियमों में कुछ परिस्थितियों में सक्रिय हुए स्टॉप-लॉस आदेश के अस्वीकार होने की संभावना का उल्लेख है। इसलिए केवल आदेश लगाने और पोजीशन वास्तव में बंद हो जाने को एक समान नहीं माना जा सकता। यह सामान्य व्यवस्था की जानकारी है; मयंक के मामले में किसी आदेश के अस्वीकार होने की पुष्टि सामने नहीं आई है। उनके बताए घटनाक्रम में प्रमुख बात समय पर पोजीशन की निगरानी और नियोजित निकासी नहीं हो पाना है।
करीब 61 लाख रुपये के इस नुकसान का दावा बताता है कि ट्रेडिंग में अनुमान के साथ क्रियान्वयन भी कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। फिर भी इसे केवल अलार्म या नींद की कहानी तक सीमित करना अधूरा होगा। यहां बड़ी खुली पोजीशन, नुकसान की निर्धारित सीमा और समय पर कार्रवाई के बीच संबंध सामने आया है। ट्रेडर ने अपनी चूक स्वीकार की है, लेकिन उसके पूरे ट्रेडिंग रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।