मुंबई: शनिवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ऑफिस मार्केट में Q3 2026 (जुलाई-सितंबर) के दौरान ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। देश के आठ प्रमुख शहरों में नेट एब्ज़ॉर्प्शन (कुल लीज़ पर ली गई जगह) 14.1 मिलियन स्क्वायर फ़ीट (MSF) तक पहुँच गया, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 26 प्रतिशत ज़्यादा है।
कुशमैन एंड वेकफ़ील्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बढ़ोतरी की वजह किराएदारों की अच्छी माँग और तिमाही के दौरान नए ऑफिस स्पेस का बड़े पैमाने पर तैयार होना था।
साल-दर-साल (YoY) आधार पर नेट एब्ज़ॉर्प्शन में 18 प्रतिशत की कमी आई, क्योंकि Q3 2025 का आधार (बेस) बहुत मज़बूत था, जिसमें उस साल का सबसे ज़्यादा तिमाही एब्ज़ॉर्प्शन देखा गया था।
इस तिमाही में एब्ज़ॉर्प्शन के मामले में हैदराबाद (4.1 MSF) और बेंगलुरु (4 MSF) सबसे आगे रहे। पूरे भारत के कुल एब्ज़ॉर्प्शन में हैदराबाद की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत रही और यह Q4 2021 के बाद से उसका सबसे ऊँचा तिमाही स्तर था।
साल की शुरुआत से अब तक (YTD) आठ प्रमुख शहरों में नेट एब्ज़ॉर्प्शन 36.7 MSF रहा। Q3 2026 में आठ प्रमुख शहरों में ग्रॉस लीज़िंग वॉल्यूम (GLV) लगभग 22 MSF रहा, जिसमें तिमाही आधार पर 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
लीज़िंग गतिविधियों में बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहाँ 5.2 MSF जगह लीज़ पर ली गई, जो तिमाही वॉल्यूम का 24 प्रतिशत है। इसके बाद हैदराबाद (4.2 MSF), मुंबई (3.9 MSF) और दिल्ली NCR (3.8 MSF) का स्थान रहा।
2026 में अब तक (YTD) लीज़िंग 64.6 MSF तक पहुँच गई है, जो किसी भी साल के शुरुआती नौ महीनों में दर्ज किया गया अब तक का सबसे ज़्यादा वॉल्यूम है। शुरुआती नौ महीनों में लीज़िंग का आँकड़ा पूरे साल 2025 के वॉल्यूम का लगभग 74 प्रतिशत तक पहुँच चुका है।
YTD गतिविधियों में नई लीज़िंग का हिस्सा सबसे ज़्यादा, यानी लगभग 75 प्रतिशत रहा। इस बीच, प्री-कमिटमेंट (प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही जगह बुक करने) का हिस्सा बढ़कर लगभग 12 प्रतिशत हो गया, जो दिखाता है कि ऑफिस लेने वाली कंपनियाँ प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही अच्छी क्वालिटी वाली ऑफिस स्पेस सुरक्षित करने पर ध्यान दे रही हैं।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ऑफिस की मांग बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाते रहे। इन्होंने Q3 2026 में 9.1 MSF जगह ली, जो कुल तिमाही GLV का 42 प्रतिशत था। बेंगलुरु और पुणे में GCCs की मौजूदगी खास तौर पर ज़्यादा रही; इन दोनों मार्केट में लीज़िंग एक्टिविटी में इस सेक्टर का योगदान लगभग 65 प्रतिशत रहा।
सेक्टर के नज़रिए से देखें तो, Q3 2026 में BFSI मांग बढ़ाने वाला सबसे बड़ा सेक्टर बनकर उभरा, जिसकी कुल लीज़िंग एक्टिविटी में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके बाद IT-BPM का स्थान रहा, जिसकी हिस्सेदारी 22 प्रतिशत थी।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के इंडिया, SEA, MEA और APAC ऑफिस और रिटेल के चीफ एग्जीक्यूटिव, अंशुल जैन ने कहा, "इस तेज़ी में GCCs की भूमिका अहम रही है, क्योंकि ग्लोबल कंपनियाँ भारत में अपनी मौजूदगी और क्षमताएँ दोनों बढ़ा रही हैं। इस मांग के पीछे कुशल लोगों की बड़ी संख्या (टैलेंट पूल), लागत के मामले में प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल बिज़नेस रणनीतियों में भारत का बढ़ता महत्व जैसे कारण हैं।"
उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे ऑफिस लेने वाली कंपनियाँ अपने पोर्टफोलियो को लंबे समय के नज़रिए से देख रही हैं, हमें भारत के ऑफिस मार्केट में लगातार ग्रोथ की उम्मीद है।"