अल नीनो की 80% संभावना, महंगाई पर असर की आशंका, CPI 5.5% तक पहुंचने का अनुमान

Update: 2026-06-14 07:11 GMT

Business बिजनेस: जून से अगस्त के दौरान अल नीनो की घटना होने की संभावना 80 प्रतिशत तक बताई गई है, जबकि इसके नवंबर तक जारी रहने की संभावना 90 प्रतिशत या उससे अधिक जताई गई है। इसके बावजूद देश में जलाशयों का जलस्तर सामान्य भंडारण (11 जून तक) से अधिक है और सब्जियों की आवक भी फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि खाद्य और ईंधन की कीमतों में किसी शुरुआती झटके का महंगाई पर कितना असर पड़ता है और आपूर्ति व्यवस्था कितनी स्थिर रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में महंगाई पर संभावित दबाव को लेकर निगरानी जरूरी है।

अर्थशास्त्री दीपान्विता मजूमदार के अनुमान के अनुसार, यदि अल नीनो के प्रभाव और कच्चे तेल की औसत कीमत 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 5.2 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मई 2026 में हेडलाइन CPI महंगाई दर 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जो बैंक ऑफ बड़ौदा रिसर्च के 4.1 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ी कम रही, लेकिन अप्रैल के 3.5 प्रतिशत की तुलना में इसमें वृद्धि देखी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर असर डाल सकती हैं, जिससे कीमतों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, मौजूदा समय में जलाशयों का बेहतर स्तर और पर्याप्त आपूर्ति स्थिति महंगाई को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि आने वाले महीनों में वैश्विक मौसमीय परिस्थितियां और कच्चे तेल की कीमतें भारत की महंगाई दर को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं, और सरकार तथा नीति निर्माताओं को इन कारकों पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

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