विदेश नहीं गई 43 हजार टन रॉ शुगर अब देश में होगी इस्तेमाल
निर्यात के बजाय देश में खपेगी 43 हजार टन रॉ शुगर
बिजनौर: देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में 43 हजार टन रॉ शुगर महत्वपूर्ण साबित होने वाली है। विदेश भेजे जाने के लिए तैयार की गई यह चीनी अब निर्यात नहीं की गई है और घरेलू बाजार में उपलब्ध कराई जा रही है। इससे स्थानीय बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ने के साथ कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक यह रॉ शुगर पहले निर्यात के उद्देश्य से तैयार की गई थी। लेकिन बदलती परिस्थितियों और घरेलू जरूरत को देखते हुए इसे विदेश भेजने के बजाय देश के बाजार में इस्तेमाल करने का रास्ता चुना गया। करीब 43 हजार टन की मात्रा होने के कारण इसका घरेलू आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
रॉ शुगर पूरी तरह तैयार सफेद चीनी से अलग होती है। उत्पादन की शुरुआती प्रक्रिया के बाद इसमें आगे रिफाइनिंग की आवश्यकता हो सकती है। घरेलू बाजार में इस्तेमाल के लिए इसे संबंधित प्रक्रिया से गुजरने के बाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकता है।
घरेलू बाजार को मिलेगी अतिरिक्त चीनी
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में चीनी की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में मिठाइयों तथा खाद्य उद्योग की मांग बढ़ने से खपत में भी इजाफा होता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्टॉक बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।43 हजार टन रॉ शुगर का निर्यात नहीं होने से यह मात्रा घरेलू उपलब्धता में जुड़ सकती है। बाजार में अतिरिक्त चीनी आने से मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कीमतों पर भी रहेगी नजर
चीनी की खुदरा कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। उत्पादन, गन्ने की उपलब्धता, मिलों का स्टॉक, परिवहन लागत, घरेलू मांग और सरकारी नीतियां इसके भाव को प्रभावित करती हैं। ऐसे में केवल 43 हजार टन अतिरिक्त उपलब्धता से कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन आपूर्ति बढ़ने से बाजार पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार के लिए भी घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी खाद्य वस्तु की उपलब्धता कम होने की आशंका पैदा होती है तो निर्यात नीति और स्टॉक प्रबंधन जैसे कदमों के जरिए घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा सकती है।
चीनी मिलों के लिए भी अहम घटनाक्रम
चीनी उद्योग के लिए निर्यात महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे मिलों को अतिरिक्त स्टॉक निकालने और नकदी प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है। दूसरी ओर घरेलू बाजार में बेहतर मांग मिलने पर मिलें स्थानीय बिक्री का विकल्प भी चुन सकती हैं। निर्यात के लिए तैयार 43 हजार टन रॉ शुगर का घरेलू इस्तेमाल इस बात का उदाहरण है कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार चीनी की दिशा बदली जा सकती है। अब यह मात्रा विदेश जाने के बजाय भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी करने में इस्तेमाल होगी।
त्योहारों के दौरान बढ़ती है मांग
देश में त्योहारों के दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ सकती है। मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और दूसरे खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को भी बड़ी मात्रा में चीनी की जरूरत होती है। ऐसे में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध रहना बाजार के लिए राहत का कारण बन सकता है।
हालांकि उपभोक्ताओं को इसका कितना लाभ मिलेगा यह आने वाले दिनों में थोक और खुदरा कीमतों की चाल से स्पष्ट होगा। यदि बाजार में पर्याप्त स्टॉक बना रहता है तो अचानक कीमत बढ़ने की आशंका को सीमित करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल 43 हजार टन रॉ शुगर का विदेश नहीं जाना घरेलू आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जो चीनी पहले दूसरे देशों के बाजारों में पहुंचने वाली थी अब उसका इस्तेमाल देश के भीतर किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता बढ़ेगी और चीनी बाजार में मांग-आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने में अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।