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इस जगह बनाई गई पक्षियों के लिए तीन मंजिल बड़ी इमारत, प्रीतिदिन करीब 5 हजार से ज्यादा पक्षी खाते है 'दाना चुग्गा'

Neha
17 Oct 2020 6:25 AM GMT
इस जगह बनाई गई पक्षियों के लिए तीन मंजिल बड़ी इमारत, प्रीतिदिन करीब 5 हजार से ज्यादा पक्षी खाते है दाना चुग्गा
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आपने पक्षी प्रेम को लेकर कई तरह की किस्से कहानियां सुनी होंगी.

आपने पक्षी प्रेम को लेकर कई तरह की किस्से कहानियां सुनी होंगी. कुछ लोगों में नेचर और पक्षियों को लेकर गजब का उत्साह होता है. ऐसी ही एक शख्सीयत है बाड़मेर के रहने वाले समाज सेवी किशनलाल और मांगीलाल, जिन्होंने पक्षियों के दाने पानी के लिए न सिर्फ एक संस्था बनाई बल्की एक तीन मंजिला इमारत ख़डी कर दी. जिसमें आज 5 हजार से ज्यादा पक्षी

दाना चुग्गा खाने आते हैं. दोनों पक्षी प्रेमियों ने पक्षियों के लिहाज से ही इमारत का महौल बनाया है. चारों तरफ पक्षियों के मार्फत पेड़ पौधे लगाए गए हैं. जिससे पक्षियों को अच्छा महौल मिलता ही है. साथ ही नेचर को भी दोनों सहेज रहे हैं. दोनों ने बताया की फिलहाल लोगों के चंदे के मदद से संस्था को चलाया जा रहा है.

पॉवरप्लाट के चलते बाड़मेर का भादरेश पूरे देश में अपना नाम कमा चुका है. जैसे जैसे विकास की रफ्तार बढ़ी लोग नेचर से दूर होते चले गए, लेकिन कुछ समाज सेवियों और नेचरप्रेमियों की वजह से अब यहां की सुबह पक्षियों के कलरव के बीच होती है. साल 2009 से यह दौर जारी है. एक समाज सेवी के पक्षी प्रेम ने यहां एक साथ 5 हजार पक्षियों को उनके लिए अनूठा आशियाना दिया है. तीन मंजिला इमारत में 5 हजार पक्षी यहां दाना खाते नजर आते हैं. इन कबूतरों को दाने पानी की समस्या ना हो इसलिए भादरेश मदानी परिवार के किशनलाल छाजेड़ एवं मांगीलाल महाजन ने पक्षीचुंगा प्रेमी संस्थान का गठन किया और चन्दा राशि जोड़कर इनके खाने-पीने की व्यवस्था की.

625 स्कवायर फीट में तीन मंजिला इमारत में पक्षीयों का बसेरा है. प्रतिदिन 150 किलोग्राम धान पक्षीयों के भोजन के लिए दिया जाता है. जिसे करीब 5000 पक्षी खाते हैं. इतने धान के लिए सालभर में करीब 10 लाख रूपये खर्च संचालन में आता है जिसके लिए चंदे की जरूरत पड़ती है. पक्षी प्रेम किशनलाल छाजेड़ बताते हैं कि छोटा से गांव होने के बाद भी देशभर के कई जगहों से पैसे आते हैं. छाजेड़ कहते हैं कि ईश्वर की माया है कि इनकी व्यवस्था हो जाती है, लोग दिल खोलकर पैसा भेजते हैं.

इतना ही नहीं यंहा पक्षियों का खास ख्याल भी रखा जाता है. उनके माहौल के अनुसार आस - पास एवं तीनों मंजिलों पर दर्जनों प्रजाति के पौधे लगवाएं गए हैं. मांगीलाल महाजन ने बताया कि आस-पास के माहौल में हरियाली रहे इसके लिए पास में 900 स्कवेयर फीट के भू-भाग पर भी पौधे लगाए गए. छाजेड़ ने बताया कि इस अनूठे आशियाने में प्रत्येक मौसम का ख्याल रखा जाता है. मौसम के हिसाब से इसकी बसावट को समय पर बदला भी जाता है. प्रक्षीयों के प्रजनन के लिए अलग से सुरक्षित स्थानों पर करीब 350 घोसलों का निर्माण किया गया, जिससे इन्हे प्रजनन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.

पक्षी प्रेमी ये जोड़ी नियमित इसकी देखभाल करते हुए भविष्य के योजना के ताने बाने बुन रही है. दोनों ने इमारत के पास में ही 900 स्कवेयर फिट के भू - भाग में आलीशान पीजन हाऊस का निर्माण करने की योजना बनाई है. पीजन हाऊस 07 मंजिला होगा. जिसमें छोटे - छोटे घरों का निर्माण करवाया जाएगा, जिससे पक्षीयों को रहने में सुविधा हो. पीजन हाऊस के आस - पास पुष्प वाटिका का निर्माण किया जाएगा जिससे पक्षी आराम से इसमें अपने माहौल में रह सकें.

जाहिर है भागती दौडती जिंदगी में आज किसी के पास वक्त नहीं है, लेकिन किशनलाल और मांगीलाल ने नेचर और पक्षियों के प्रति अपना जो समर्पण दिखाया है वो दूसरों के लिए नजीर बनेगा.

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