मुहर्रम जुलूस के वीडियो ने खींचा एलन मस्क का ध्यान, उनके रिएक्शन पर मची बहस
वायरल वीडियो पर एलन मस्क का चौंकाने वाला रिएक्शन
Elon Musk के रीपोस्ट किए गए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा छेड़ दी है। यूके की एक व्यस्त सड़क पर लोगों की भारी भीड़ को देखकर यूज़र्स इसके मकसद पर बहस कर रहे हैं।
इस वीडियो को सबसे पहले X यूज़र RadioGenoa ने शेयर किया था। इसमें दुकानों और बिज़नेस वाली एक कमर्शियल सड़क पर सैकड़ों लोगों को इकट्ठा देखा जा सकता है। ज़्यादातर लोग काले कपड़े पहने हुए हैं और लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीट रहे हैं, जबकि परिवार, दर्शक, महिलाएं और बच्चे किनारे खड़े होकर यह सब देख रहे हैं।
ओरिजिनल पोस्ट का कैप्शन था, "ऐसा नहीं हो सकता कि मैनचेस्टर ऐसा हो गया हो।" इस पर हज़ारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी और भीड़ की जगह और मकसद के बारे में अटकलें लगाईं।
जगह को लेकर उठे सवाल
जैसे-जैसे क्लिप वायरल हुई, सोशल मीडिया यूज़र्स ने यह पता लगाने की कोशिश की कि इसे कहाँ शूट किया गया था। एक यूज़र ने एलन मस्क के AI चैटबॉट, Grok से पूछा, "यह कौन सा देश है?"
Grok ने जवाब दिया: "वहाँ मौजूद दुकानों (कबाब हाउस, सनम, जिलानीज़, दुबई ज्वैलरी), लाल ईंटों वाली ब्रिटिश इमारतों, ट्रैफ़िक लाइट और सड़क के लेआउट के आधार पर, यह यूनाइटेड किंगडम है - लगभग निश्चित रूप से बर्मिंघम, वेस्ट मिडलैंड्स। यह मुहर्रम/आशूरा का जुलूस जैसा लग रहा है।"
इस जवाब ने चर्चा को और तेज़ कर दिया। यूज़र्स ने वीडियो में दिख रहे लैंडमार्क की तुलना की और बहस की कि यह कार्यक्रम मैनचेस्टर, बर्मिंघम या किसी अन्य ब्रिटिश शहर में हुआ था।
धार्मिक समारोह को समझना
कई यूज़र्स ने वीडियो में दिखाए गए दृश्यों के महत्व को समझाया।
एक व्यापक रूप से शेयर की गई व्याख्या में कहा गया: "जो लोग जानना चाहते हैं उनके लिए इस कार्यक्रम की व्याख्या: यह वीडियो शिया मुसलमानों की 'मातम' (छाती पीटने) की प्रथा को दिखाता है, जो इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम के दौरान होती है।"
पोस्ट में आगे बताया गया कि यह रस्म 680 ईस्वी में हुई कर्बला की लड़ाई की याद में की जाती है। इस लड़ाई में पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन और उनके साथियों को ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के कारण मार दिया गया था।
व्याख्या के अनुसार, इसमें शामिल लोग दुख और याद के तौर पर लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीटते हैं। यह प्रथा खास तौर पर आशूरा से जुड़ी है, जो मुहर्रम के 10वें दिन मनाया जाता है और इमाम हुसैन की शहादत का प्रतीक है। यूज़र ने निष्कर्ष निकाला: "संक्षेप में कहें तो: यह हिंसा या गुस्सा नहीं है, बल्कि धार्मिक शोक का एक रूप है, कर्बला की याद और उसके महत्व को जीवित रखने का एक तरीका है।"
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस वायरल वीडियो पर ऑनलाइन लोगों की राय बंटी हुई दिखी। कुछ यूज़र्स ने भीड़ के आकार को लेकर चिंता जताई, जबकि दूसरों ने इस घटना को नकारात्मक रूप से पेश करने की कोशिशों की आलोचना की।
एक कमेंट करने वाले ने लिखा, "बस इतना कह दो कि तुम नस्लवादी हो, अब छिपाने की ज़रूरत नहीं है।"
वहीं, कई अन्य लोगों ने सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ पर ध्यान केंद्रित करते हुए तर्क दिया कि ये दृश्य किसी प्रकार की अशांति के बजाय एक लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा को दर्शाते हैं।
जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ी, यह वीडियो इस बात का एक और उदाहरण बन गया कि कैसे ऑनलाइन शेयर किए गए छोटे क्लिप अलग-अलग तरह की व्याख्याओं को जन्म दे सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें दिखाई जा रही घटनाओं के बारे में बिना किसी पृष्ठभूमि की जानकारी के देखा जाए।