World News : ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर जेडी वेंस का निशाना

Update: 2025-03-29 02:59 GMT

कोपेनहेगन/वाशिंगटन: अमेरिकी सीनेटर जेडी वेंस ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर डेनमार्क सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं में पर्याप्त निवेश नहीं किया, जबकि यह इलाका भू-राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की जनता बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की हकदार है और डेनमार्क को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए।

ग्रीनलैंड क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?

ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है और वहां अमेरिका का एक बड़ा सैन्य ठिकाना थुले एयर बेस भी मौजूद है। यह इलाका रूस, अमेरिका और नाटो के लिए सामरिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। आर्कटिक में बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है।

अमेरिका लंबे समय से ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से अपने प्रभाव में रखना चाहता है। 2019 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव भी दिया था, जिसे डेनमार्क ने सख्ती से खारिज कर दिया था।

वेंस के आरोप और डेनमार्क की प्रतिक्रिया

वेंस का कहना है कि डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं किया, जिससे यह क्षेत्र आक्रमण और जासूसी गतिविधियों के लिए संवेदनशील बना हुआ है। उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता का हवाला देते हुए कहा कि अगर डेनमार्क पर्याप्त निवेश नहीं कर सकता, तो अमेरिका को इस पर कदम उठाना चाहिए

डेनमार्क सरकार ने वेंस के आरोपों को असत्य बताते हुए कहा कि वह ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अधिकारियों का कहना है कि डेनमार्क आर्कटिक क्षेत्र में नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत कर रहा है

क्या ग्रीनलैंड को अमेरिका के समर्थन की जरूरत है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण ग्रीनलैंड की सुरक्षा अहम मुद्दा बन गया है। अमेरिका पहले से ही वहां अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है, लेकिन वेंस के बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर अधिक प्रभाव चाहता है

अगर डेनमार्क ने इस क्षेत्र में सुरक्षा निवेश नहीं बढ़ाया, तो भविष्य में अमेरिका इस पर और दबाव बना सकता है। इससे न केवल डेनमार्क-अमेरिका संबंध प्रभावित होंगे, बल्कि ग्रीनलैंड के लोगों के लिए भी नई भू-राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं

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