वॉशिंगटन: अमेरिका में काम कर रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा से जुड़ी प्रक्रिया अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने उस व्यवस्था को हटाने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत समान परिस्थितियों वाले कुछ कार्य वीजा विस्तार आवेदनों में पहले दी गई मंजूरी को महत्व दिया जाता है। इसे ‘डिफरेंस पॉलिसी’ कहा जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बदलाव अभी प्रस्तावित है। इसे लागू हो चुका फैसला या सभी एच-1बी धारकों की छूट समाप्त होने की घोषणा समझना सही नहीं होगा। 
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और नागरिकता एवं आव्रजन सेवा की यह प्रस्तावित नियमावली 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुई। संबंधित पक्षों से 13 नवंबर 2026 तक टिप्पणियां मांगी गई हैं। प्रस्ताव का केंद्र आवेदन की जांच में पुरानी मंजूरी को दिए जाने वाला महत्व है। इसका संबंध प्रत्येक एच-1बी धारक को शुल्क, पात्रता या वीजा संख्या की सीमा से मिलने वाली किसी सामान्य छूट को समाप्त करने से नहीं है। अंतिम नियम और उसकी प्रभावी तारीख सामने आने पर ही लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी। 
मौजूदा व्यवस्था को सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि किसी कर्मचारी और उसके नियोक्ता से जुड़े मूल तथ्य पहले जैसे हैं और उसी श्रेणी में विस्तार मांगा जाता है, तो अधिकारी सामान्यतः पिछली पात्रता मंजूरी को महत्व देते हैं। हालांकि, इसका अर्थ बिना जांच के मंजूरी मिलना नहीं है। पहले निर्णय में महत्वपूर्ण गलती, परिस्थितियों में बड़ा बदलाव या पात्रता के खिलाफ नई जानकारी होने पर अधिकारी अलग निर्णय ले सकते हैं। इसलिए वर्तमान नीति भी आवेदनकर्ता को पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती।
इस नीति का इतिहास भी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। अमेरिकी आव्रजन एजेंसी ने अप्रैल 2021 में जारी मार्गदर्शन में समान पक्षों और समान तथ्यों वाले विस्तार अनुरोधों में पुराने निर्णय को महत्व देने का निर्देश फिर लागू किया था। उस मार्गदर्शन में भी गलती, महत्वपूर्ण बदलाव और नए तथ्यों से जुड़े अपवाद रखे गए थे। इससे पहले ट्रंप के पहले कार्यकाल में 2017 में संबंधित मार्गदर्शन वापस लिया गया था। दिसंबर 2024 की नियमावली में इस व्यवस्था को नियामकीय आधार मिला। 
एच-1बी व्यवस्था का उपयोग अमेरिकी नियोक्ता विशेष योग्यता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने के लिए करते हैं। इसके अंतर्गत तकनीक के अलावा अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्र भी आते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मार्गदर्शन के अनुसार, किसी विशेष पेशे से जुड़ी एच-1बी याचिका को सामान्यतः एक बार में अधिकतम तीन वर्ष तक मंजूरी दी जा सकती है। इस कारण अमेरिका में लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों के लिए विस्तार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहती है। हर विस्तार के साथ रोजगार और अधिकृत प्रवास की निरंतरता का प्रश्न जुड़ा होता है। 
ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे पेशेवरों के लिए यह विषय और महत्वपूर्ण है। कुछ पात्र मामलों में स्वीकृत रोजगार आधारित आव्रजन याचिका होने, लेकिन उपलब्ध वीजा संख्या के अभाव में स्थायी निवास नहीं मिल पाने पर छह वर्ष की सामान्य सीमा से आगे भी एच-1बी विस्तार संभव होता है। अमेरिकी विदेश विभाग का मार्गदर्शन ऐसी परिस्थितियों में तीन-तीन वर्ष के विस्तार की व्यवस्था बताता है। इसका मतलब है कि स्थायी निवास मिलने तक कुछ कर्मचारी बार-बार विस्तार प्रक्रिया से गुजर सकते हैं। 
इसी व्यवस्था को देखते हुए भारतीय पेशेवरों पर संभावित असर समझा जा सकता है। जिन कर्मचारियों का अमेरिका में रोजगार लंबे समय तक विस्तार की मंजूरी पर निर्भर है, उनके लिए समीक्षा में अतिरिक्त अनिश्चितता करियर और पारिवारिक योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। यह संभावित प्रभाव का आकलन है; प्रस्ताव आने मात्र से किसी व्यक्ति की नौकरी, वर्तमान स्वीकृति या ग्रीन कार्ड आवेदन अपने आप समाप्त नहीं होता। व्यक्तिगत असर आवेदन की स्थिति, पात्रता और भविष्य में जारी होने वाले अंतिम नियम पर निर्भर करेगा।
नियोक्ताओं के लिए संभावित चुनौती दस्तावेज तैयार करने और आवेदनों की प्रक्रिया संभालने से जुड़ी होगी। अधिक विस्तृत समीक्षा की स्थिति में कंपनी को कर्मचारी के पद, काम की प्रकृति और पात्रता के समर्थन में अतिरिक्त सामग्री देनी पड़ सकती है। इससे मानव संसाधन तथा आव्रजन मामलों को संभालने वाली टीमों की तैयारी का महत्व बढ़ेगा। किसी कर्मचारी की नियुक्ति या परियोजना की समयसीमा तय करते समय संभावित अतिरिक्त प्रक्रिया को ध्यान में रखना व्यावहारिक आवश्यकता बन सकता है। अतिरिक्त जांच का अर्थ अनिवार्य रूप से आवेदन खारिज होना नहीं है।
प्रशासन ने प्रस्ताव के समर्थन में पात्रता की समीक्षा मजबूत करने, आव्रजन व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा का तर्क दिया है। दूसरी ओर, इस बदलाव का व्यावहारिक महत्व उन आवेदनों की पूर्वानुमेयता से जुड़ा है जिनमें मूल परिस्थितियां नहीं बदली हैं। फिलहाल ध्यान सार्वजनिक टिप्पणी प्रक्रिया और अंतिम नियम पर रहेगा। भारतीय टेक पेशेवरों के लिए मुख्य प्रश्न यह होगा कि प्रस्ताव अंतिम रूप में कितना बदलता है और भविष्य के विस्तार आवेदनों पर उसकी शर्तें कैसे लागू की जाती हैं।
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