Washington वॉशिंगटन: माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने रविवार को कहा कि समाज को जल्द ही यह तय करना होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर टैक्स कैसे लगाया जाए और कौन सी नौकरियां इंसानों के लिए सुरक्षित रखी जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि AI "दुनिया को पिछली सभी टेक्नोलॉजी की तुलना में कहीं ज़्यादा बदल देगा," क्योंकि रोज़गार पर इसके असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
CNN के 'स्टेट ऑफ़ द यूनियन' प्रोग्राम में, होस्ट जेक टैपर ने गेट्स से उनकी उस पुरानी चेतावनी के बारे में पूछा जिसमें उन्होंने कहा था कि लगभग सभी सेक्टर में AI की वजह से नौकरियों का नुकसान "अभूतपूर्व" होगा, और शिक्षा व हेल्थकेयर में कुछ काम इंसानों के लिए सुरक्षित रखने की बात कही थी। गेट्स ने कहा कि वह देख रहे हैं कि "ये मॉडल कितनी तेज़ी से बेहतर हो रहे हैं और इंसानी मेहनत की जगह AI का इस्तेमाल करने के पीछे क्या वजहें हैं"। उन्होंने कहा, "आने वाले सालों में, हमें एक समाज के तौर पर यह तय करना होगा कि हम AI या रोबोट के इस्तेमाल पर टैक्स कैसे लगाएं? और हम कहां यह पक्का करना चाहते हैं कि इंसानों की नौकरियां बनी रहें?"
उन्होंने आगे कहा, "जब तक लोग यह नहीं समझ जाते कि यह कितना ताकतवर है और इसलिए यह नौकरियों पर क्या असर डालेगा, तब तक इंसानों के लिए कुछ काम सुरक्षित रखने का विचार अजीब लग सकता है, लेकिन असल में हम उस स्थिति तक पहुंचेंगे।" गेट्स, जिन्होंने पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट के दौर को बनाने में मदद की थी, ने कहा कि वे "बड़ी बातें थीं, लेकिन इसकी तुलना में कुछ भी नहीं"। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा और तुरंत खतरा "बुरे लोगों द्वारा AI का इस्तेमाल" है, खासकर साइबर हमलों के लिए। उन्होंने अनुमान लगाया कि "अगले साल, हम AI कंपनियों के 'सेल्फ-गवर्नेंस' (खुद नियम बनाने) से आगे बढ़कर एविएशन और दवाओं जैसी सरकारी सुरक्षा संस्थाओं के दायरे में आ जाएंगे"।
गेट्स ने कहा कि उन्होंने "कई राजनेताओं" से बात की है और उम्मीद है कि "समय आने पर" वह ट्रंप और "उनके खास लोगों" के साथ अपनी चिंताओं पर चर्चा करेंगे। लेकिन उनकी यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री - जिसके प्रोफेशनल्स को सबसे ज़्यादा US H-1B वीज़ा मिलते हैं - को अपने बिज़नेस में AI से होने वाले बदलाव और US के सख्त होते इमिग्रेशन नियमों, दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
नैसकॉम ने कहा कि हायरिंग के तरीके में "संख्या (वॉल्यूम) से हटकर स्किल मिक्स (हुनर के आधार पर चयन) की ओर बदलाव" की उम्मीद है, जो AI से होने वाले प्रोडक्टिविटी के फ़ायदे को क्लाइंट्स तक पहुंचाने को दिखाएगा। 'द हिंदू बिजनेसलाइन' के अनुसार, नैसकॉम की चेयरपर्सन सिंधु गंगाधरन ने फरवरी में कहा था कि AI प्रोडक्टिविटी बढ़ा रहा है और काम का तरीका बदल रहा है, लेकिन साथ ही यह नए मौकों के रास्ते भी खोल रहा है।
वॉशिंगटन में, भारतीय IT कंपनियों पर पॉलिसी से जुड़ा दबाव भी बढ़ रहा है। गुरुवार को, लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने इन्फोसिस, टाटा, विप्रो और HCL समेत आठ कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया। यह प्रोग्राम एम्प्लॉयर-स्पॉन्सर्ड ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है और इन कंपनियों पर चल रही जांच का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया।
पिछले हफ्ते ओहियो में एक चुनावी रैली के दौरान वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने चेतावनी दी कि जो कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कानूनी अप्रवासियों (इमिग्रेंट्स) को काम पर रखेंगी, उन्हें "भारी टैरिफ" का सामना करना पड़ सकता है। कुछ नई H-1B याचिकाओं पर एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से लगाई गई 1,00,000 डॉलर की फीस को दो फेडरल जजों ने रोक दिया है।
H-1B प्रोग्राम के तहत अमेरिकी कंपनियां खास तरह के कामों के लिए विदेशी कर्मचारियों को कुछ समय के लिए काम पर रख सकती हैं। US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ के डेटा से पता चलता है कि फिस्कल ईयर 2024 में मंज़ूर हुई 71 प्रतिशत H-1B याचिकाएं भारत में जन्मे लोगों के लिए थीं। PERM लेबर सर्टिफिकेशन का वह चरण है जिसके ज़रिए कई कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंस) के लिए स्पॉन्सर करती हैं।
Tags: