Pakistan-Occupied Jammu and Kashmir (PoJK) | गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान रविवार को तनावपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हुआ। मतदान के दौरान कई इलाकों में हिंसा, प्रदर्शन और राजनीतिक विवाद की स्थिति बनी रही। मुजफ्फराबाद समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों की खबर सामने आई। इस दौरान फायरिंग की घटनाओं में तीन लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है, जबकि कई लोग घायल बताए गए हैं।
चुनाव से पहले ही क्षेत्र में राजनीतिक माहौल काफी गर्म था। पिछले दो महीनों से ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इन प्रदर्शनों के कारण कई इलाकों में तनाव बना हुआ था। मतदान के दिन भी इसका असर देखने को मिला और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुजफ्फराबाद सहित कुछ इलाकों में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। आरोप है कि स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षाबलों की ओर से फायरिंग की गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक मृतकों की संख्या और घटना की पूरी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि सुरक्षाबलों ने कई इलाकों में तलाशी अभियान चलाया और इस दौरान बल प्रयोग किया गया। एक निवासी ने आरोप लगाया कि एक 35 वर्षीय व्यक्ति की उसके घर में गोली लगने से मौत हो गई। इस घटना के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
मतदान प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बाधित रहने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। संचार सेवाएं प्रभावित होने के कारण चुनावी गतिविधियों और आम जनजीवन पर असर पड़ा। युवाओं के एक वर्ग ने खराब हालात और तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए मतदान से दूरी बनाए रखने की बात कही।
विपक्षी दलों ने भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान में देरी और अनियमितताओं का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं चल पाई।
पूर्व प्रधानमंत्री सरदार अब्दुल कयूम नियाजी ने भी चुनावी हालात को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि इंटरनेट बंद होने, सड़कों के बाधित होने और हिंसक घटनाओं के बीच स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती है।
इसके अलावा, खराब मौसम ने भी मतदान प्रक्रिया को प्रभावित किया। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण एक मतदान केंद्र पर मतदान स्थगित करना पड़ा। प्रशासन ने सुरक्षा और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच मतदान संपन्न कराने की कोशिश की।
गुलाम जम्मू-कश्मीर का यह चुनाव राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, दूसरे चरण के मतदान के दौरान हुई हिंसा और विपक्ष के आरोपों ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम और आधिकारिक जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा की घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।