अमेरिका ने दिवाली पर जारी किया खास डाक टिकट, भारतीय कलाकार की रंगोली ने बढ़ाई खूबसूरती
वॉशिंगटन। अमेरिका में भारतीय संस्कृति और परंपराओं को सम्मान देते हुए अमेरिकी डाक सेवा (USPS) ने दिवाली के अवसर पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया है। इस टिकट पर भारतीय मूल की कलाकार संगीता भूताडा द्वारा बनाई गई बेहद खूबसूरत रंगोली का डिजाइन प्रदर्शित किया गया है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 की शाम वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में आयोजित समारोह में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, अमेरिकी डाक सेवा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिबानी गंभीर और कलाकार संगीता भूताडा ने संयुक्त रूप से डाक टिकट का अनावरण किया। रंग-बिरंगी रंगोली से सजा यह टिकट भारतीय संस्कृति, सौहार्द और दिवाली की परंपराओं को दर्शाता है। खास बात यह है कि अमेरिकी डाक सेवा ने करीब दस साल बाद दूसरी बार दिवाली के सम्मान में नया डाक टिकट जारी किया है। इससे पहले वर्ष 2016 में दिवाली पर विशेष टिकट जारी किया गया था।
भारतीय दूतावास में हुआ विशेष समारोह
अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में बुधवार शाम दिवाली डाक टिकट के अनावरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, अमेरिकी डाक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी शिबानी गंभीर और रंगोली कलाकार संगीता भूताडा उपस्थित रहीं।
समारोह के दौरान भारतीय परंपराओं और दिवाली के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया गया।
राजदूत क्वात्रा ने कलाकार संगीता भूताडा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सुंदर रंगोली कलाकृतियों के माध्यम से भारत की प्राचीन परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने इस पहल को भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान से जोड़कर देखा।
रंगोली से सजा बेहद आकर्षक डाक टिकट
अमेरिकी डाक सेवा की ओर से जारी विशेष डाक टिकट पर नीले, नारंगी, हरे, लाल और सफेद रंगों से बनी आकर्षक रंगोली दिखाई गई है।
रंगोली को बैंगनी पृष्ठभूमि पर प्रस्तुत किया गया है, जिससे इसका डिजाइन और भी प्रभावशाली नजर आता है।
इस कलाकृति को कलाकार संगीता भूताडा ने विशेष रूप से तैयार किया था।
रंगोली बनाने के लिए रंगीन रेत और स्टार्च आधारित रंगीन पाउडर का इस्तेमाल किया गया।
इसके बाद फोटोग्राफर विजय दीक्षित ने रंगोली की तस्वीर ली, जिसे डाक टिकट के लिए चुना गया।
टिकट को जेनिफर अर्नोल्ड ने डिजाइन किया है, जबकि विलियम जे. गिकर ने कला निर्देशक की जिम्मेदारी निभाई।
30 वर्षों से रंगोली बना रही हैं संगीता भूताडा
संगीता भूताडा भारतीय मूल की कलाकार हैं और लंबे समय से अमेरिका के ह्यूस्टन क्षेत्र में रह रही हैं।
वह करीब 30 वर्षों से रंगोली कला से जुड़ी हुई हैं। भारतीय संस्कृति की इस पारंपरिक कला को उन्होंने अमेरिका में भी जीवित रखा है।
संगीता ने बताया कि अमेरिकी डाक सेवा ने इस विशेष टिकट के लिए उनसे एक साल से अधिक समय पहले संपर्क किया था।
उन्होंने डाक सेवा के अधिकारियों के सामने करीब एक दर्जन डिजाइन प्रस्तुत किए थे। इनमें से चार डिजाइन प्रारंभिक चयन के लिए चुने गए।
इसके बाद अंतिम रंगोली तैयार की गई।
दस दिन में तैयार हुई आठ फीट की रंगोली
कलाकार संगीता भूताडा के अनुसार, जिस रंगोली की तस्वीर डाक टिकट पर इस्तेमाल की गई है, उसे तैयार करने में लगभग दस दिन लगे।
इस रंगोली का मूल आकार करीब आठ फीट व्यास का था।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी डाक सेवा की ओर से उन्हें चमकीले रंगों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया था, ताकि डिजाइन डाक टिकट पर स्पष्ट और आकर्षक दिखाई दे।
इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नीले, नारंगी, हरे, लाल और सफेद रंगों का इस्तेमाल किया।
उनकी इस कलाकृति को अब अमेरिकी डाक सेवा के आधिकारिक डाक टिकट पर स्थान मिला है।
दिवाली पर रंगोली का विशेष महत्व
दिवाली भारत के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस पर्व पर घरों और सार्वजनिक स्थानों को दीपकों, फूलों और रंगोली से सजाने की परंपरा है।
रंगोली भारतीय लोककला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे आमतौर पर रंगीन चावल के पाउडर, चॉक, फूलों की पंखुड़ियों और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बनाया जाता है।
मान्यता है कि रंगोली घर में सौभाग्य और सकारात्मकता का प्रतीक होती है।
अमेरिकी डाक सेवा ने भी अपने आधिकारिक विवरण में रंगोली को एक जीवंत पारंपरिक कला बताया है।
डाक सेवा के अनुसार, दिवाली बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव है।
दस साल बाद दिवाली पर दूसरा टिकट
अमेरिकी डाक सेवा ने पहली बार वर्ष 2016 में दिवाली के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।
अब वर्ष 2026 में दूसरा विशेष दिवाली टिकट जारी किया गया है।
इस बार रंगोली को प्रमुखता दी गई है। यह डिजाइन भारतीय संस्कृति की विविधता और दिवाली की परंपराओं को दर्शाता है।
अमेरिकी डाक सेवा ने बताया कि यह टिकट 21 अक्टूबर से देशभर में उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस विशेष टिकट को 20 टिकटों की शीट में बेचा जाएगा।
'फॉरएवर स्टाम्प' के रूप में जारी किया गया
दिवाली के अवसर पर जारी यह विशेष टिकट अमेरिकी डाक सेवा का 'फॉरएवर स्टाम्प' है।
इसका अर्थ है कि टिकट खरीदने के बाद भविष्य में डाक शुल्क बढ़ने पर भी यह निर्धारित प्रथम श्रेणी की एक औंस तक की डाक भेजने के लिए वैध रहेगा।
इस सुविधा के कारण टिकट संग्रहकर्ताओं के साथ आम लोगों के लिए भी इसका उपयोग आसान होगा।
अमेरिकी डाक सेवा ने इस टिकट की कुल दो करोड़ प्रतियां छापने की योजना बनाई है।
टिकट देशभर के डाकघरों और अमेरिकी डाक सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।
शिबानी गंभीर ने बताया सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक
अमेरिकी डाक सेवा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिबानी गंभीर ने कार्यक्रम में कहा कि अमेरिका लंबे समय से विभिन्न देशों और समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को डाक टिकटों के माध्यम से सम्मान देता रहा है।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी डाक सेवा वर्ष 1893 से दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों और ऐतिहासिक उपलब्धियों को स्मारक टिकटों के माध्यम से पहचान देती रही है।
गंभीर के अनुसार, डाक टिकट अमेरिका की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत को प्रस्तुत करने का माध्यम हैं।
दिवाली पर जारी नया टिकट भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
अमेरिका में भारतीय समुदाय के लिए खास अवसर
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। वे दिवाली सहित विभिन्न भारतीय त्योहारों को उत्साह के साथ मनाते हैं।
ह्यूस्टन, न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और वॉशिंगटन सहित कई क्षेत्रों में दिवाली के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अमेरिकी डाक सेवा का यह कदम भारतीय मूल के समुदाय के लिए सांस्कृतिक पहचान और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
इस विशेष टिकट के माध्यम से भारत की पारंपरिक रंगोली कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है।
आठ नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली
अमेरिकी डाक सेवा के अनुसार, वर्ष 2026 में दिवाली का मुख्य पर्व आठ नवंबर को मनाया जाएगा।
इस वर्ष पांच दिवसीय उत्सव छह नवंबर से शुरू होगा।
दिवाली के अवसर पर जारी रंगोली वाला डाक टिकट त्योहार से पहले ही उपलब्ध करा दिया गया है, ताकि लोग शुभकामना पत्रों और अन्य डाक सामग्री के लिए इसका उपयोग कर सकें।
भारतीय मूल की कलाकार संगीता भूताडा की कलाकृति को अमेरिकी डाक टिकट पर स्थान मिलने से भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।
यह पहल भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संबंधों तथा विविध परंपराओं के प्रति सम्मान का उदाहरण बन गई है।