अमेरिका ने भारत के साथ 2030 तक इतने अरब डॉलर के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बनाया 'गठबंधन'

विश्व के शीर्ष ऊर्जा सम्मेलन आईएचएस सीईआरए विक के दौरान इसकी जानकारी दी

Update: 2021-03-06 14:19 GMT
अमेरिका ने भारत के साथ 2030 तक इतने अरब डॉलर के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बनाया गठबंधन
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बाइडेन प्रशासन (Biden Administration) के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका (America) ने 2030 तक करीब 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने में भारत (India) की मदद के लिए कई देशों का एक गठजोड़ (Alliance) बनाया है. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य (Targhet) को हासिल करने में करीब 600 अरब डॉलर की लागत आएगी.

जलवायु विषयों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के विशेष दूत जॉन केरी ने कहा कि अमेरिका ने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में कोष के जरिए भारत की मदद करने को इच्छुक कई देशों का एक समूह बनाया है. उन्होंने विश्व के शीर्ष ऊर्जा सम्मेलन आईएचएस सीईआरए विक के दौरान इसकी जानकारी दी.
भारत की मदद करने के लिए तैयार हुए देश
केरी ने कहा कि भारत के लिए इस लक्ष्य को प्राप्त करना सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि मैंने कई देशों को मिलाकर एक छोटे समूह बनाया है. इन देशों ने भारत की सहायता करने के लिए अपनी सहमति जताई है. हम इस लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करने के लिए काम कर रहे हैं. इसके लिए देश के इन्वेस्टमेंट हाउस से संपर्क किया जा रहा है ताकि पूंजी का सही ढंग से इस्तेमाल किया जा सके.
जलवायु परिवर्तन पर गंभीर बाइडेन प्रशासन
अमेरिका का नया बाइडेन प्रशासन जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काफी गंभीर है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति बाइडेन ने शपथ ग्रहण के कुछ ही देर बाद पेरिस जलवायु समझौते में अमेरिका की वापसी का फैसला लिया था. संयुक्त राष्ट्र ने भी बाइडेन के इस फैसले की तारीफ करते हुए कहा था कि पिछले चार वर्षों से 'प्रमुख साझेदार' की गैर-मौजूदगी ने ऐतिहासिक समझौते को कमजोर किया.
बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को ऐतिहासिक पेरिस समझौते से अलग कर लिया था. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने उस फैसले को 'ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और वैश्विक सुरक्षा को बढ़ावा देने के वैश्विक प्रयासों के लिए एक बड़ी निराशा' करार दिया था.


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