नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। भारत और युगांडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। युगांडा की संसद के स्पीकर जैकब मार्कसन्स ओबोथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और आर्थिक सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने युगांडा के विकास में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की। इस बीच युगांडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को 'मूल निवासी' समुदाय के रूप में मान्यता देने का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, इस संबंध में किसी नए सरकारी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।ओबोथ ने 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के संविधान सदन में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। यह बैठक 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और संसदीय सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात में सहयोग बढ़ाने पर जोर
युगांडा के संसद अध्यक्ष ओबोथ ने भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।उन्होंने भारतीय बाजार में युगांडा के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों में निवेश आकर्षित करने की आवश्यकता जताई।ओबोथ ने कहा कि युगांडा की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देना जरूरी है।उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई।
भारतीय समुदाय को मिल सकता है मूल निवासी का दर्जा?
युगांडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को स्थानीय समुदाय के रूप में संवैधानिक मान्यता देने की मांग काफी पुरानी है।वर्ष 2019 में युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने भारतीय समुदाय को स्थानीय जनजातीय पहचान देने की संभावना का संकेत दिया था। हालांकि, तत्कालीन लैंगिक मामलों की राज्यमंत्री पीस मुतुजो ने इस पर आपत्ति जताई थी।उन्होंने कहा था कि युगांडा के संविधान में मूल निवासी समुदायों की पहचान के लिए ऐतिहासिक प्रावधान हैं और भारतीय मूल के लोगों को इस श्रेणी में शामिल करना कानूनी रूप से जटिल है।ऐसे में समुदाय को आधिकारिक दर्जा देने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है।
युगांडा की अर्थव्यवस्था में भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका
युगांडा में भारतीय मूल के लोगों की लंबे समय से व्यापार, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।वर्ष 1972 में तत्कालीन शासक ईदी अमीन के शासन के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों को देश छोड़ना पड़ा था। बाद में कई परिवार वापस लौटे और उन्होंने व्यापार एवं उद्योगों में दोबारा अपनी गतिविधियां शुरू कीं।युगांडा सरकार भी समय-समय पर देश के आर्थिक विकास में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करती रही है।भारत और युगांडा के बीच ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बनाने में इस समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की तैयारी
ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान ओबोथ ने कहा कि भारत और युगांडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा करीब 1.35 अरब डॉलर तक रहा है।उन्होंने भारतीय निवेशकों से युगांडा में स्थानीय उत्पादन और प्रसंस्करण उद्योगों में निवेश बढ़ाने की अपेक्षा जताई।युगांडा वर्ष 2025 में ब्रिक्स का साझेदार देश बना था। इससे उसे सदस्य और साझेदार देशों के साथ आर्थिक एवं विकास संबंधी सहयोग बढ़ाने के अतिरिक्त अवसर मिले हैं।
डिजिटल तकनीक और विकास पर भी चर्चा
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स संसदीय मंच में डिजिटल नवाचार, मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संस्थागत मजबूती और सतत विकास जैसे विषय भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रहे।ओबोथ के नेतृत्व में युगांडा का संसदीय प्रतिनिधिमंडल इन मुद्दों पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श में भाग ले रहा है।भारत और युगांडा के बीच संसदीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयास भी जारी हैं। सितंबर में ओबोथ ने अंतरराष्ट्रीय संसदीय संपर्कों को वास्तविक निवेश और विकास अवसरों में बदलने पर जोर दिया था।
भारत-युगांडा संबंधों को मिलेगी नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2018 में युगांडा की यात्रा की थी। उस दौरान उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करने के साथ युगांडा की संसद में भी भाषण दिया था।इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।अब संसद अध्यक्ष ओबोथ की भारत यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के नए अवसर सामने आए हैं।भारतीय समुदाय को ‘मूल निवासी’ का दर्जा देने संबंधी चर्चा का भविष्य युगांडा सरकार के औपचारिक निर्णय और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।