यूएन महासचिव की दौड़ में लाना नुसेइबेह, यूएई ने किया नामांकन
यूएई की मंत्री ने पेश की दावेदारी
संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त अरब अमीरात की राज्यमंत्री और अनुभवी राजनयिक लाना जकी नुसेइबेह संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने की दौड़ में शामिल हो गई हैं। यूएई ने 21 अक्टूबर को उनके नाम का औपचारिक प्रस्ताव पेश किया। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरस का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए चल रही प्रक्रिया में नुसेइबेह की दावेदारी ने एक नया विकल्प जोड़ दिया है।
नुसेइबेह लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनकी उम्मीदवारी ऐसे समय सामने आई है, जब सुरक्षा परिषद के प्रभावशाली सदस्यों के बीच अगले महासचिव के नाम पर सहमति नहीं बन सकी है। हालांकि, औपचारिक नामांकन का अर्थ चयन होना नहीं है। उन्हें अन्य उम्मीदवारों की तरह सदस्य देशों का समर्थन हासिल करना होगा।
यूएई के राष्ट्रपति ने भेजा नामांकन
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के अध्यक्षों को पत्र भेजकर नुसेइबेह का नाम प्रस्तावित किया है। नामांकन में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े उनके अनुभव, अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को समझने की क्षमता और कूटनीतिक कामकाज का उल्लेख किया गया है। नुसेइबेह 2013 से 2024 तक संयुक्त राष्ट्र में यूएई की स्थायी प्रतिनिधि रहीं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बहुपक्षीय प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया। यूएई की 2022–2023 की सुरक्षा परिषद सदस्यता के दौरान उन्होंने दो बार परिषद की अध्यक्षता भी संभाली। महासभा की उपाध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था के कार्यकारी बोर्ड की अध्यक्ष के रूप में काम करने का अनुभव भी उनके पास है।
खाड़ी सहयोग परिषद ने दिया समर्थन
खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों ने नुसेइबेह की उम्मीदवारी का सर्वसम्मति से समर्थन किया है। परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अलबुदैवी ने 22 अक्टूबर को इसकी घोषणा की। उन्होंने नुसेइबेह के कूटनीतिक अनुभव और संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में उनके काम की सराहना की। यह समर्थन उनके अभियान के लिए क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। हालांकि, महासचिव पद के चयन में किसी एक क्षेत्र का समर्थन पर्याप्त नहीं होता। उम्मीदवार को अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं वाले देशों के बीच स्वीकार्यता बनानी पड़ती है। सुरक्षा परिषद की सिफारिश तक पहुंचने के लिए व्यापक कूटनीतिक सहमति आवश्यक होगी।
शांति और परिणाम देने वाली कूटनीति पर जोर
अपनी दावेदारी की घोषणा करते हुए नुसेइबेह ने संयुक्त राष्ट्र के प्रति भरोसा मजबूत करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि संगठन के वादों और जमीन पर मिलने वाले परिणामों के बीच दूरी बढ़ने से उसकी कार्रवाई करने की क्षमता प्रभावित होती है। उन्होंने मतभेद रखने वाले देशों के बीच व्यावहारिक सहमति बनाने को अपनी प्राथमिकता बताया। उनके दृष्टिपत्र में संघर्ष रोकने, कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने और मानवीय सहायता पहुंचाने जैसे मुद्दों पर जोर है। स्थानीय युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली जैसे सीमित लेकिन उपयोगी समझौतों को व्यापक शांति की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में देखा गया है। अपनी उम्मीदवारी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने यूएई सरकार में अपने पद से अवकाश लिया है।
संगठन में सुधार भी अभियान का हिस्सा
नुसेइबेह ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की बात भी कही है। उनके कार्यक्रम में प्राथमिकताएं स्पष्ट करने, काम के दोहराव को कम करने और जरूरत वाली जगहों तक नेतृत्व तथा संसाधन पहुंचाने का प्रस्ताव है। विकास के क्षेत्र में उन्होंने देशों की अपनी प्राथमिकताओं, रोजगार और टिकाऊ समृद्धि पर ध्यान देने की बात रखी है। मानवाधिकारों के मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून और सार्वभौमिक सिद्धांतों के समान अनुपालन पर जोर दिया गया है। ये फिलहाल उनके चुनाव अभियान के प्रस्ताव हैं; इन्हें संयुक्त राष्ट्र की स्वीकृत नीति नहीं माना जाना चाहिए।
अब तक किसी उम्मीदवार पर निर्णायक सहमति नहीं
नुसेइबेह की दावेदारी से पहले हुई अनौपचारिक रायशुमारी में कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपान को बढ़त मिली थी। फिर भी स्थायी सदस्यों के विरोध के कारण किसी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई। अर्जेंटीना के राफेल ग्रॉसी और गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट भी प्रमुख दावेदारों में रहे हैं। अनौपचारिक मतदान उम्मीदवारों के समर्थन का संकेत देता है, लेकिन वह अंतिम नियुक्ति नहीं है। इसी गतिरोध के बीच नए नाम के आने से सदस्य देशों के सामने विकल्प बढ़ा है। नुसेइबेह यदि चुनी जाती हैं, तो संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला महासचिव होंगी।
कैसे चुना जाएगा अगला महासचिव?
महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा करती है। परिषद में सिफारिश के लिए कम से कम नौ सदस्यों का समर्थन और पांच स्थायी सदस्यों में से किसी का वीटो न होना आवश्यक है। अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस इस प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका रखते हैं। गुटेरस का कार्यकाल समाप्त होने से पहले अगले नेतृत्व पर सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल नुसेइबेह ने औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश की है और क्षेत्रीय समर्थन हासिल किया है। आगे उनकी संभावनाएं सुरक्षा परिषद में स्वीकार्यता और सदस्य देशों के बीच बनने वाली सहमति पर निर्भर करेंगी।