तुर्की | तुर्की में एक बार फिर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। इस्तांबुल के मेयर और राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी इक्रेम इमामोगलू की गिरफ्तारी के बाद देशभर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
इमामोगलू पर भ्रष्टाचार और टेरर फंडिंग के आरोप लगाए गए हैं, हालांकि उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह गिरफ्तारी ऐसे वक्त में हुई है जब 2028 के चुनावों से पहले इमामोगलू को एर्दोगन के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा माना जा रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इमामोगलू की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी और उन्हें सत्ता से दूर रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है। तुर्की में जनता इस गिरफ्तारी को लोकतंत्र पर हमला बता रही है और सड़कों पर उतरकर एर्दोगन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है।
इमामोगलू का समर्थन सिर्फ तुर्की तक सीमित नहीं है। यूरोपीय यूनियन और अमेरिका ने भी इस कार्रवाई पर चिंता जताई है। सवाल यह है कि क्या एर्दोगन अपनी सत्ता बचाने के लिए अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को रास्ते से हटा रहे हैं? यह मामला तुर्की की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है।