नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच दोनों देशों के रुख में फिलहाल अंतर बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की ओर से युद्ध रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने से जुड़ी पहल को स्वीकार नहीं किया है। ट्रम्प का कहना है कि ईरान दबाव में है और इसी वजह से वह होर्मुज को जल्द खोलना चाहता है।
व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की आर्थिक स्थिति पर संघर्ष का असर पड़ा है और उसकी आय का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज से होने वाले समुद्री व्यापार से जुड़ा है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मौजूदा संकट का समाधान बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है।
ईरान ने रखा था सात दिन का रोडमैप
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका तक सात दिन का एक प्रस्ताव पहुंचाया था। इसमें पहले सैन्य कार्रवाई रोकने और ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की मांग रखी गई थी।
ईरान के प्रस्ताव के मुताबिक, अगर शुरुआती शर्तों पर अमल होता है तो सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे विवादित मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।
ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई करीब 12 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने की मांग भी रखी थी। प्रस्ताव में लेबनान और यमन समेत क्षेत्र के अन्य हिस्सों में संघर्ष विराम की जरूरत का भी उल्लेख था।
ईरान बोला- बातचीत से ही निकलेगा रास्ता
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि युद्ध को समाप्त करने का रास्ता बातचीत से निकल सकता है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि ईरान अमेरिकी दबाव में अपनी स्थिति बदलने के लिए तैयार नहीं है।
23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान पजशकियान ने ईरान के रुख को दोहराया था। उन्होंने कहा था कि देश बाहरी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है और संकट का समाधान कूटनीतिक तरीके से खोजा जाना चाहिए।
चुनाव के बाद फिर हमले की आशंका की रिपोर्ट
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई की संभावना पर ट्रम्प प्रशासन में चर्चा हुई है।
अल जजीरा की रिपोर्टिंग में भी अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अमेरिकी प्रशासन के बयानों में बदलाव की ओर ध्यान दिलाया गया है। हालांकि, भविष्य में सैन्य कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर अभी कोई निश्चित फैसला सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
तेल टैंकरों पर बढ़ा तनाव
8 सितंबर को अमेरिकी सेना की ओर से ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई की खबर सामने आई थी। इसके बाद ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की बात सामने आई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिका ने इसी घटनाक्रम को तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा।
इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आईं। इस घटनाक्रम ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज को लेकर चिंता बढ़ा दी।
28 फरवरी से जारी है सैन्य संघर्ष
अमेरिका और इजराइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद संघर्ष लगातार बढ़ता गया। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई की।
अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु तकनीक के इस्तेमाल के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा।
फिलहाल होर्मुज खोलने, युद्ध रोकने और भविष्य की बातचीत की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद कायम हैं। ऐसे में संघर्ष का अगला रुख सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत पर भी निर्भर करेगा।
Tags: