नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर भौगोलिक जगहों के नाम बदलने को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दुनिया के दो बड़े महासागरों में से किसी एक को नया नाम देने की बात कही है। ट्रम्प चाहते हैं कि अटलांटिक या पैसिफिक महासागर को ‘ट्रम्प ओशन’ या ‘ओशन ऑफ द अमेरिका’ कहा जाए। हालांकि, अभी यह सिर्फ उनका सुझाव है और इस पर अमेरिकी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी नहीं है।
शनिवार को टेनेसी में एक चुनावी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने महासागर का नाम बदलने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के तौर पर अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने से पहले वह एक महासागर और एक बड़ी नदी को नया नाम देना चाहेंगे।
उनकी यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंसने लगे। कई समर्थकों ने तालियां बजाकर प्रतिक्रिया दी। ट्रम्प का मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल जनवरी 2029 में समाप्त होना है। ऐसे में उनके पास इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए करीब दो साल का समय है।
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने किसी महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र के लिए अपने नाम का इस्तेमाल करने की इच्छा दिखाई हो। इससे पहले वह होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘ट्रम्प स्ट्रेट’ कहने का विचार सामने रख चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस संबंध में पोस्ट भी किए थे। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इसलिए इससे जुड़ी किसी भी राजनीतिक टिप्पणी पर दुनिया के कई देशों की नजर रहती है।
ट्रम्प के ऐसे बयानों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी देश का राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले समुद्री इलाकों का नाम अपनी पसंद से बदल सकता है।
मेक्सिको की खाड़ी के नाम पर पहले हो चुका है विवाद
ट्रम्प ने जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद मेक्सिको की खाड़ी को अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ नाम देने का आदेश जारी किया था। इस फैसले पर मेक्सिको ने आपत्ति जताई थी। अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने भी अपनी पत्रकारिता में पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखने का फैसला किया। इसके बाद व्हाइट हाउस के कार्यक्रमों में एजेंसी की पहुंच को लेकर कानूनी विवाद पैदा हो गया।
ट्रम्प न्यू मेक्सिको राज्य के लिए ‘न्यू अमेरिका’ नाम का विचार भी रख चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में वहां के लोगों की राय महत्वपूर्ण होगी।
क्या अमेरिका पूरे महासागर का नाम बदल सकता है?
किसी भौगोलिक क्षेत्र का नाम बदलने और उस नाम को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने में बड़ा अंतर होता है। अमेरिकी प्रशासन अपने सरकारी नक्शों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड में किसी स्थान के लिए अलग नाम निर्धारित कर सकता है। लेकिन अमेरिका के इस फैसले को दुनिया के दूसरे देशों के लिए मानना जरूरी नहीं होगा।
अटलांटिक और पैसिफिक महासागर कई महाद्वीपों और देशों से जुड़े हैं। इनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और व्यापार के लिए होता है। इसलिए किसी एक सरकार का फैसला इनके विश्व स्तर पर प्रचलित नाम को अपने आप नहीं बदल सकता। नया नाम अपनाने से महासागर पर अमेरिका का मालिकाना अधिकार भी स्थापित नहीं होगा।
अभी सिर्फ बयान, आधिकारिक फैसला नहीं
ट्रम्प की ताजा टिप्पणी के बाद महासागर का नाम बदलने को लेकर चर्चा जरूर शुरू हुई है, लेकिन फिलहाल कोई औपचारिक आदेश या प्रस्ताव सामने नहीं आया है। यह भी साफ नहीं है कि ट्रम्प इस विचार को वास्तविक सरकारी नीति में भी बदलना चाहते हैं या उन्होंने समर्थकों के बीच हल्के अंदाज में यह बात कही थी।
अगर अमेरिकी प्रशासन भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाता है, तो दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल अटलांटिक और पैसिफिक महासागरों के मौजूदा नाम ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
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