Washington वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'डेलाइट सेविंग टाइम' को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंज़ूर हुए कानून को सीनेट से भी मंज़ूरी मिलनी चाहिए।
ट्रंप ने सोमवार को मिशिगन में जनरल मोटर्स के मिलफोर्ड प्रोविंग ग्राउंड में कर्मचारियों से बात करते हुए यह मुद्दा उठाया। उनका यह प्रस्ताव उनके पिता के कैडिलैक कारों के शौक के बारे में बात करते हुए आया।
राष्ट्रपति ने याद किया कि उनके पिता हर दो साल में नई कैडिलैक कार मिलना लग्ज़री या शान की बात मानते थे।
ट्रंप ने कहा, "और उन्हें हर दो साल में कार मिलती थी, आप पक्का मान सकते थे। आप अपनी घड़ी का समय भी उसके हिसाब से मिला सकते थे।"
उन्होंने आगे कहा, "और हाँ, इसी बात पर, चलिए 'डेलाइट सेविंग टाइम' वाली चीज़ को खत्म करते हैं, ठीक है?"
ट्रंप ने कहा कि घड़ी के समय में मौसम के हिसाब से बदलाव करने से जुड़ा कानून पहले से ही कांग्रेस में विचाराधीन है।
उन्होंने कहा, "हमारे पास एक बिल है। उम्मीद है कि सीनेट उसमें सुधार करेगी। हाउस ने इसे मंज़ूरी दे दी है, और हम इसे खत्म करने जा रहे हैं।"
ट्रंप ने कैडिलैक कारों से 'डेलाइट सेविंग टाइम' की बात पर अचानक आने को अपने बोलने के अंदाज़ का हिस्सा बताया, जिसमें वे मुख्य मुद्दे पर लौटने से पहले अलग-अलग विषयों पर बात करते हैं।
उन्होंने कहा, "आप जानते हैं, इसे 'वीव' (विषयों को आपस में जोड़ना) कहते हैं, है ना? मैं अलग-अलग बातें करता हूँ — लेकिन हम हमेशा सही विषय पर वापस आ जाते हैं।"
राष्ट्रपति ने कानून के बारे में और जानकारी नहीं दी और न ही यह बताया कि वे हमेशा के लिए 'स्टैंडर्ड टाइम' चाहते हैं या 'डेलाइट सेविंग टाइम'।
वे तुरंत ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की बात पर लौट आए और याद किया कि उनके पिता ने अपनी कैडिलैक कार को लंबा करवाया था ताकि वे खुद उसे चला सकें या जब कोई और गाड़ी चला रहा हो तो पीछे बैठ सकें।
ट्रंप ने कहा, "वे खुद गाड़ी चला सकते थे, या किसी और से भी चलवा सकते थे, लेकिन वे खुद भी चला सकते थे। क्या आपने कभी ऐसा सुना है? यह कार के लिए एक नया कॉन्सेप्ट हो सकता है।"
अमेरिका का ज़्यादातर हिस्सा साल में दो बार अपनी घड़ियों का समय बदलता है - वसंत में समय आगे बढ़ाया जाता है और पतझड़ में पीछे किया जाता है। इस प्रथा को खत्म करने के पक्ष में तर्क देने वालों का कहना है कि इन बदलावों से नींद, यात्रा और कामकाज के शेड्यूल में खलल पड़ता है, जबकि इस बात पर बहस जारी है कि कौन सा समय सिस्टम हमेशा के लिए लागू किया जाना चाहिए।
फ़ेडरल सिस्टम में किसी भी बदलाव के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों से कानून पास होना और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होना ज़रूरी होगा। अमेरिका की घड़ी से जुड़ी नीति में बदलाव का असर भारत के साथ मौसमी समय के अंतर, अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन शेड्यूल, फाइनेंशियल मार्केट और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच बातचीत पर भी पड़ेगा।