वॉशिंगटन: US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर अगले हफ़्ते मिल्वौकी में G20 देशों के व्यापार मंत्रियों की मेज़बानी करेंगे। इस बैठक में ज़बरदस्ती काम कराने (फ़ोर्स्ड लेबर), खाने-पीने की चीज़ों के व्यापार, इंडस्ट्री में ज़रूरत से ज़्यादा प्रोडक्शन क्षमता और ग्लोबल ट्रेडिंग सिस्टम के मुख्य सिद्धांत में संभावित बदलावों पर बातचीत होगी।
US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफ़िस से शुक्रवार को जारी प्रोग्राम के अनुसार, यह मंत्रियों की बैठक 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक होगी।
ग्रीर ग्लोबल सप्लाई चेन से ज़बरदस्ती काम कराने की प्रथा को खत्म करने और स्ट्रक्चरल रूप से ज़रूरत से ज़्यादा प्रोडक्शन और क्षमता की समस्या से निपटने पर चर्चा की अगुवाई करेंगे। भारत का प्रतिनिधित्व कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल करेंगे।
मंत्री 'मोस्ट-फ़ेवर्ड-नेशन' (MFN) सिद्धांत को अपडेट करने और खाने-पीने की चीज़ों के व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल करने (जिसे USTR ने व्यापार का हथियार बनाना कहा है) की निंदा करने पर भी चर्चा करेंगे।
'मोस्ट-फ़ेवर्ड-नेशन' सिद्धांत के तहत, वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (WTO) के किसी सदस्य देश को एक सदस्य को दिया गया व्यापार फ़ायदा दूसरे सदस्यों को भी देना होता है, सिवाय उन मामलों के जो WTO के नियमों के तहत अपवाद माने जाते हैं।
USTR की रिलीज़ में उस सिद्धांत में होने वाले बदलावों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिनका प्रस्ताव वॉशिंगटन मिल्वौकी बैठक में दे सकता है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार शाम को 'बिज़नेस राउंडटेबल' और 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ मैन्युफ़ैक्चरर्स' द्वारा आयोजित स्वागत समारोह से होगी।
औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत बुधवार सुबह 'ग्लोबल फ़ोरम ऑन स्टील एक्सेस कैपेसिटी' की मंत्रियों की बैठक से होगी।
स्टील का प्रोडक्शन और इंडस्ट्री में ज़रूरत से ज़्यादा प्रोडक्शन क्षमता अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विवाद के बड़े मुद्दे बन गए हैं। अमेरिका ने बार-बार ज़रूरत से ज़्यादा प्रोडक्शन को घरेलू मैन्युफ़ैक्चरर्स और वर्कर्स पर दबाव से जोड़ा है।
स्टील पर बैठक के बाद, ग्रीर और आए हुए मंत्री मिल्वौकी में 'रॉकवेल ऑटोमेशन' की फ़ैसिलिटी का दौरा करेंगे।
USTR के अनुसार, वे प्लांट का दौरा करते हुए फ़ैक्टरी वर्कर्स और इंडस्ट्री के अधिकारियों से मिलेंगे।
इस दौरे का मकसद ट्रंप प्रशासन के इस दावे को उजागर करना है कि उसका व्यापार कार्यक्रम अमेरिका में फिर से इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रहा है और सप्लाई चेन को मज़बूत कर रहा है।
ग्रीर बुधवार दोपहर G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के पहले औपचारिक सत्र में शुरुआती भाषण देंगे।
उस शाम, US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव का ऑफ़िस और US एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट आए हुए प्रतिनिधिमंडलों के लिए स्वागत डिनर आयोजित करेंगे।
मुख्य मंत्रियों की बातचीत गुरुवार को होगी। कार्यक्रम में सुबह का सत्र शामिल है जो दोपहर 1 बजे तक चलेगा और दूसरा सत्र दोपहर में होगा। ग्रीर का दोनों सेशन के बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का कार्यक्रम है।
तीन दिन का यह प्रोग्राम मिल्वौकी के हार्ले-डेविडसन म्यूज़ियम में एक रिसेप्शन के साथ खत्म होगा।
USTR की घोषणा में ग्रीर की अलग-अलग ट्रेड मिनिस्टर्स के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। G20 मीटिंग के दौरान ऐसी बैठकें होने से शामिल देशों को उन विवादों और बातचीत पर चर्चा करने का मौका मिलता है जो बड़े मिनिस्टीरियल एजेंडा का हिस्सा नहीं होते।
मिल्वौकी को चुनने का मतलब है कि यह मीटिंग अमेरिका के एक मैन्युफैक्चरिंग सेंटर में हो रही है। प्रोग्राम में फैक्ट्री का दौरा, स्टील की क्षमता, वर्कर्स और सप्लाई-चेन की मज़बूती पर ज़ोर देना यह भी दिखाता है कि सरकार ट्रेड पॉलिसी को घरेलू इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन से जोड़ने पर ध्यान दे रही है।
भारत G20 का सदस्य है और उसने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया है कि ग्लोबल इकोनॉमिक फैसलों में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं को ज़्यादा अहमियत दी जाए। फ़ूड ट्रेड, इंडस्ट्रियल क्षमता, सप्लाई चेन और भेदभाव-रहित नियमों के भविष्य से जुड़े सवालों का भारत के एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग पर सीधा असर पड़ता है।
मिल्वौकी में हो रही यह मिनिस्टीरियल मीटिंग ऐसे समय में हो रही है जब सरकारें कुछ खास जगहों पर निर्भर सप्लाई चेन और मौजूदा इंटरनेशनल ट्रेड नियमों की असरदारता पर फिर से विचार कर रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच कमर्शियल संबंध बढ़े हैं, लेकिन उनके ट्रेड रिश्तों में टैरिफ, मार्केट तक पहुंच, कृषि उत्पादों और मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम में विकासशील देशों के साथ बर्ताव को लेकर मतभेद भी रहे हैं।
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