मक्का डिफेंस पैक्ट में ईरान की एंट्री संभव प्रस्ताव पर विचार कर रहा तेहरान
रक्षा गठबंधन
तेहरान: पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति के बीच ईरान को सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के नए ‘मक्का समझौते’ में शामिल होने का न्योता मिलने का दावा सामने आया है। ईरानी अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक तीनों देशों ने तेहरान को इस संयुक्त रक्षा व्यवस्था में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि ईरान ने अभी औपचारिक रूप से इसमें शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इसी वजह से कुछ विश्लेषक इसकी तुलना NATO के अनुच्छेद 5 से कर रहे हैं, हालांकि इसकी संस्थागत संरचना NATO जैसी नहीं है।
ईरान को मिला न्योता
रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने के लिए निमंत्रण मिला है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समझौता सामने आने के शुरुआती दिनों में ईरान की ओर से इसे लेकर आलोचनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। अब निमंत्रण की खबर ने इस रक्षा समझौते को नया मोड़ दे दिया है। अगर ईरान इसमें शामिल होता है तो यह केवल तीन देशों का रक्षा गठबंधन न रहकर पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं ज्यादा व्यापक भूमिका निभा सकता है।
पहले ईरान ने उठाए थे सवाल
मक्का समझौते की घोषणा के बाद ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। ईरानी पक्ष का कहना था कि क्षेत्र की सुरक्षा किसी बाहरी शक्ति या केवल समझौतों पर निर्भर नहीं हो सकती और देशों को आपसी सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। अब ईरान को इसी समझौते में शामिल होने का न्योता मिलने से परिस्थितियां बदल सकती हैं। यदि तेहरान प्रस्ताव स्वीकार करता है तो लंबे समय से चले आ रहे सुन्नी-शिया भू-राजनीतिक विभाजन के बीच यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम होगा।
क्या ईरान स्वीकार करेगा प्रस्ताव?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं। रिपोर्टों में ईरान की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया का संकेत जरूर दिया गया है, लेकिन उसकी औपचारिक सदस्यता की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईरान निश्चित रूप से मक्का समझौते का हिस्सा बनने जा रहा है। तेहरान के लिए फैसला आसान भी नहीं होगा। उसे सऊदी अरब के साथ सुधरते संबंधों, तुर्किए के साथ क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंधों के साथ अपनी स्वतंत्र सुरक्षा नीति का भी ध्यान रखना होगा।
सऊदी अरब और ईरान के रिश्तों पर भी नजर
सऊदी अरब और ईरान लंबे समय तक पश्चिम एशिया में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर गंभीर मतभेद रहे हैं। हाल के वर्षों में हालांकि दोनों पक्षों ने कूटनीतिक संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। ऐसे में यदि ईरान सऊदी अरब के नेतृत्व वाले किसी व्यापक सुरक्षा ढांचे में शामिल होता है तो इसे क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा। इससे यह संकेत भी मिल सकता है कि पश्चिम एशिया के देश अपनी सुरक्षा के लिए नए क्षेत्रीय विकल्प तलाश रहे हैं।
पाकिस्तान और तुर्किए की बढ़ेगी भूमिका
मक्का समझौते में पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता के कारण महत्वपूर्ण है, जबकि तुर्किए NATO सदस्य होने के साथ एक बड़ी क्षेत्रीय सैन्य शक्ति और रक्षा उपकरण निर्माता है। सऊदी अरब की आर्थिक ताकत के साथ इन तीनों देशों का सहयोग पहले ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान के जुड़ने पर इस समीकरण में एक और बड़ी सैन्य और क्षेत्रीय शक्ति शामिल हो जाएगी। इससे खाड़ी क्षेत्र से लेकर दक्षिण एशिया तक सुरक्षा समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
अभी अंतिम फैसले का इंतजार
फिलहाल ईरान को न्योता मिलने की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन तेहरान की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है। इसलिए मक्का समझौते में ईरान की सदस्यता को अभी तय नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में ईरानी नेतृत्व की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह प्रस्ताव केवल कूटनीतिक पहल बनकर रह जाता है या पश्चिम एशिया में एक बड़े नए सुरक्षा गठबंधन की नींव रखता है।