ताइपे: ताइवान ने भारत को चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने में मदद करने का भरोसा दिया है। ताइवान के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने कहा कि ताइवान भारत के साथ आर्थिक सहयोग को गहरा करने और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में पूरी तरह सहयोग करेगा।
ताइवान का क्या कहना है?
ताइवान के उप NSA ने एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा,
"भारत और ताइवान के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की जरूरत है। हम भारत को उच्च गुणवत्ता वाली तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग में समर्थन देने के लिए तैयार हैं, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके।"
भारत-चीन व्यापार घाटा क्यों है चिंता का विषय?
- 2024 में भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।
- भारत चीन से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल्स का आयात करता है, जबकि निर्यात काफी कम है।
- सरकार चीन पर निर्भरता घटाने और नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश में है।
कैसे मदद कर सकता है ताइवान?
- चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में सहयोग – ताइवान, जो दुनिया का चिप मैन्युफैक्चरिंग हब है, भारत को सेमीकंडक्टर उत्पादन में मदद कर सकता है।
- मैन्युफैक्चरिंग निवेश – कई ताइवानी कंपनियां भारत में अपने प्लांट लगाने को इच्छुक हैं।
- तकनीकी साझेदारी – भारत के स्टार्टअप और टेक इंडस्ट्री को उन्नत तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला में ताइवान का सहयोग मिल सकता है।
क्या होगा असर?
- भारत को चीन पर व्यापारिक निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
- ताइवान को एक नया बड़ा व्यापारिक साझेदार मिल सकता है।
- दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।
भारत और ताइवान के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी चीन को कूटनीतिक रूप से भी चुनौती दे सकती है, क्योंकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और भारत-ताइवान संबंधों को लेकर पहले भी आपत्ति जता चुका है।