New दिल्ली : स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन के अगले सप्ताह भारत दौरे पर आने की संभावना है। प्रस्तावित यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हो सकती है। हालांकि इस आगामी दौरे की विस्तृत आधिकारिक तारीख और कार्यक्रम फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। पार्मेलीन इसी साल फरवरी में भी भारत आए थे, जब उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लिया था।
फरवरी की यात्रा के दौरान 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गाइ पार्मेलीन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की थी। बातचीत में व्यापार और निवेश, विज्ञान एवं तकनीक, इनोवेशन, कौशल विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषय शामिल रहे थे।
स्विस राष्ट्रपति का संभावित नया दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और स्विट्जरलैंड के आर्थिक संबंधों को नई गति मिली है। फरवरी में हुई बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन यानी EFTA और भारत के बीच व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते के बाद पैदा हुए अवसरों पर भी चर्चा की थी। स्विट्जरलैंड EFTA का महत्वपूर्ण सदस्य है।
दोनों नेताओं ने उस समय व्यापार और निवेश के प्रवाह को और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। भारत और EFTA के बीच हुए समझौते को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में यदि पार्मेलीन की आगामी यात्रा होती है तो व्यापार, निवेश और समझौते के क्रियान्वयन की प्रगति पर फिर बातचीत होने की संभावना रह सकती है।
भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। विज्ञान और तकनीक, अनुसंधान, इनोवेशन तथा कौशल विकास भी सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं। फरवरी की बैठक में दोनों पक्षों ने इनोवेशन आधारित विकास, संयुक्त अनुसंधान, बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण के जरिए क्षमता निर्माण को मजबूत करने पर सहमति जताई थी।
शिक्षा और प्रतिभा के आवागमन का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी की मुलाकात के बाद शिक्षा, टेक्नोलॉजी और टैलेंट मोबिलिटी के क्षेत्र में संपर्क बढ़ाने पर विशेष जोर दिया था। भारत में बड़ी संख्या में युवा तकनीकी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अवसर तलाश रहे हैं, जबकि स्विट्जरलैंड अनुसंधान, इंजीनियरिंग और उच्च कौशल वाले उद्योगों के लिए जाना जाता है।
फरवरी में पार्मेलीन AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए 19 और 20 फरवरी को दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए थे। नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के नेताओं, मंत्रियों, उद्योग जगत और तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी को समिट का उद्घाटन किया था
AI इम्पैक्ट समिट के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, वैश्विक प्रशासन और इसके जिम्मेदार विकास पर व्यापक चर्चा हुई थी। पार्मेलीन ने उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के अलावा अन्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की थी।
स्विट्जरलैंड ने 2027 में जिनेवा में अगले AI समिट की मेजबानी करने की घोषणा भी की है। पार्मेलीन ने फरवरी की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इसकी जानकारी दी थी। स्विट्जरलैंड का उद्देश्य AI के विकास में अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और जिम्मेदार तकनीकी इस्तेमाल जैसे मुद्दों को प्रमुखता देना है।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सांस्कृतिक तथा लोगों से लोगों के संबंध भी लंबे समय से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा, कारोबार और प्रोफेशनल मोबिलिटी के जरिए लगातार संपर्क बना हुआ है। द्विपक्षीय वार्ताओं में इन क्षेत्रों को और मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है।
संभावित आगामी यात्रा में दोनों नेताओं के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हो सकता है। फरवरी की बैठक में भी मोदी और पार्मेलीन ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की थी।
पार्मेलीन सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुले व्यापार और देशों के बीच संवाद को मजबूत करने की बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बातचीत और आपसी सम्मान आधारित सहयोग महत्वपूर्ण है।
स्विस राष्ट्रपति की संभावित भारत यात्रा ऐसे समय हो सकती है जब दोनों देश आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन से लेकर नई तकनीक, अनुसंधान और निवेश तक कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देशों के बीच नए अवसर बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और पार्मेलीन की फरवरी की बैठक का प्रमुख संदेश भी भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाना था। दोनों पक्षों ने तब संबंधों को और मजबूत करने की साझा इच्छा जताई थी।
अब अगर अगले सप्ताह स्विस राष्ट्रपति की यात्रा होती है तो कुछ ही महीनों में मोदी और पार्मेलीन की यह दूसरी भारत में द्विपक्षीय मुलाकात होगी। इससे दोनों देशों के बीच जारी उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल आगामी यात्रा का पूरा आधिकारिक कार्यक्रम सामने आना बाकी है। ऐसे में संभावित तारीखों, बैठकों और समझौतों को लेकर अंतिम जानकारी भारत और स्विट्जरलैंड की सरकारों की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
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