नई दिल्ली। इजरायल में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच भारत में इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के नतीजे चाहे जो भी हों, भारत और इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हैं और किसी भी नई सरकार के सत्ता में आने से इन रिश्तों पर जरा भी असर नहीं पड़ेगा।सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सिरोटा ने कहा कि इजरायल और भारत के संबंध किसी एक राजनीतिक दल या नेता तक सीमित नहीं हैं। दूतावास इजरायल में चुनी जाने वाली किसी भी सरकार के साथ काम करेगा। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग और दोस्ती लंबे समय से मजबूत आधार पर कायम है।
27 अक्टूबर को इजरायल में मतदान
मिशेल सिरोटा के अनुसार, इजरायल में 27 अक्टूबर को राष्ट्रीय चुनाव के लिए मतदान होना है। इस चुनाव में लगभग 73 लाख पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मतदान में बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेंगे।सिरोटा ने इजरायल की लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव नागरिकों को यह तय करने का अवसर देते हैं कि अगले चार वर्षों में देश का नेतृत्व कैसा हो और उसकी दिशा क्या हो। उन्होंने चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव बताया, जिसमें जनता अपनी पसंद की सरकार चुनती है।
भारत और इजरायल के बीच कई समानताएं
इजरायली दूतावास की प्रवक्ता ने भारत और इजरायल की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच समानताओं पर भी चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, बहुलवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बताया।सिरोटा ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि इजरायल मध्य पूर्व का एकमात्र लोकतंत्र है। उनके अनुसार, इन साझा मूल्यों से दोनों देशों के संबंधों को मजबूती मिलती है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायली दूतावास किसी विशेष राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि पूरे देश और वहां चुनी जाने वाली सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए नई सरकार बनने के बाद भी भारत के साथ राजनयिक सहयोग जारी रहेगा।
रक्षा और तकनीक में सहयोग महत्वपूर्ण
भारत और इजरायल के संबंध रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में फैले हुए हैं। दोनों देश सुरक्षा जरूरतों और उन्नत तकनीकों के आदान-प्रदान पर भी सहयोग करते रहे हैं।फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया था। इस दौरान रक्षा, व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी।इसी व्यापक सहयोग के कारण इजरायल में सरकार बदलने की स्थिति में भी दोनों देशों के बीच स्थापित संस्थागत संबंधों के जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्षेत्रीय संघर्ष के बीच शांति की उम्मीद
सिरोटा ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बाद इजरायल के कई नागरिक बेहतर और शांतिपूर्ण भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ शांति से रहने की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही इजरायली नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने का विषय इजरायल के राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अलग-अलग राजनीतिक विचारों के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा पर व्यापक सहमति है।
नई सरकार के साथ भी जारी रहेगा सहयोग
मिशेल सिरोटा का बयान ऐसे समय में आया है, जब इजरायल के चुनाव न केवल देश की घरेलू राजनीति, बल्कि पश्चिम एशिया की कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।उन्होंने दोहराया कि इजरायल में जनता जिस भी सरकार को चुनेगी, दूतावास उसके साथ मिलकर काम करेगा। उनके बयान का मुख्य संदेश यही है कि भारत-इजरायल संबंध किसी एक सरकार के बजाय दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों और सहयोग पर आधारित हैं।
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