वाशिंगटन: एक ओर अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ खड़ा दिख रहा है। सैन्य अभ्यास कर रहा है तो दूसरी ओर उत्तर कोरिया से संबंधों को लेकर नए संकेत भी दिए जाने लगे हैं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने लिबरेशन डे पर नॉर्थ के साथ संवाद की इच्छा जताई तो कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के साथ तस्वीर साझा कर दी। उन्होंने 2019 की मुलाकात की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि दोनों के बीच रिश्ते अब भी अच्छे हैं।
ट्रंप ने शनिवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर पनमुनजोम में हुई मुलाकात की तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा, "इस तस्वीर में दोनों के भाव भले ही कुछ अलग नजर आ रहे हों, लेकिन ऐसी कई अन्य तस्वीरें हैं जिनमें वे मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं।" उन्होंने किम के साथ अपने रिश्ते को फिर से रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों “बहुत अच्छे से मिलते हैं।”
ट्रंप और किम के बीच पहली ऐतिहासिक मुलाकात जून 2018 में सिंगापुर में हुई थी। इसके बाद दोनों फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में मिले थे। हालांकि, हनोई वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। जून 2019 में दोनों की तीसरी मुलाकात पनमुनजोम में हुई, जहां ट्रंप ने सैन्य सीमांकन रेखा पार कर कुछ समय के लिए उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखा था। ऐसा करने वाले वह पहले पदासीन अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे।
ट्रंप का ताजा पोस्ट ऐसे समय आया है जब उनका प्रशासन लगातार संकेत दे रहा है कि राष्ट्रपति किम के साथ बिना पूर्व शर्त बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्योंगयांग इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा या नहीं। उत्तर कोरिया के रूस के साथ बढ़ते सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक संबंध भी अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं।
इससे पहले जून में भी सिंगापुर में किम के साथ अपनी पहली मुलाकात की तस्वीर ट्रंप ने साझा की थी। लगातार पुरानी तस्वीरें साझा करने से यह अटकलें तेज हुई हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति उत्तर कोरियाई नेता के साथ अपनी व्यक्तिगत कूटनीति को दोबारा सक्रिय करना चाहते हैं।
योनहाप न्यूज एजेंसी ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि भविष्य में ट्रंप और किम के बीच फिर से शिखर वार्ता की संभावना बन सकती है। हालांकि, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिका के प्रतिबंधों और प्योंगयांग के रूस के साथ गहरे होते संबंधों के बीच किसी नए संवाद की राह आसान नहीं होगी।
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