न्यूयॉर्क: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 81वीं UN जनरल असेंबली के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख हाफ़िज़ सईद से जुड़े सवालों को टाल दिया और आतंकवाद से इस्लामाबाद के कथित संबंधों पर पूछे गए सीधे सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में शरीफ़ को UN मुख्यालय पहुँचते हुए देखा गया, जहाँ पत्रकारों ने उनसे पूछा: "प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?" शरीफ़ ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
जब वह UN परिसर से बाहर निकले तो यह मुद्दा फिर से उठा। पत्रकारों ने पूछा, "आप लश्कर-ए-तैयबा (LeT) प्रमुख हाफ़िज़ सईद पर मुक़दमा कब चलाएँगे?" शरीफ़ ने एक बार फिर जवाब देने से इनकार कर दिया और सवाल का जवाब दिए बिना पत्रकारों के पास से गुज़र गए।
हाफ़िज़ सईद पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन LeT का संस्थापक है और भारत के सबसे वांछित वैश्विक आतंकवादियों में से एक है। वह UN द्वारा सूचीबद्ध वैश्विक आतंकवादी बना हुआ है और अमेरिकी सरकार ने उस पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है।
इससे पहले बुधवार को, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए इस्लामाबाद से कहा कि वह क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएँ पालने या सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन करने के बजाय अपनी लड़खड़ाती और बेलआउट पर निर्भर अर्थव्यवस्था को ठीक करने पर ध्यान दे।
UN मानवाधिकार परिषद में, भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने ध्यान भटकाने की पाकिस्तान की कोशिशों का जवाब देते हुए कहा कि आक्रामक रवैया उसकी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकता।
त्यागी ने कहा, "पाकिस्तान दूसरों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने या आतंकवाद फैलाने के बजाय विकास पर ध्यान देकर अपने लोगों की बेहतर सेवा कर सकता है, क्योंकि न तो ये हरकतें और न ही परिषद में उसके दिखावे से उन कर्ज़ों को चुकाने में मदद मिलेगी जिन पर उसकी अर्थव्यवस्था टिकी हुई है।" त्यागी ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में आम नागरिकों के हिंसक दमन का ज़िक्र करते हुए इस्लामाबाद के घरेलू कामकाज का कच्चा-चिट्ठा भी खोलकर रख दिया। वहाँ बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को जानलेवा बल का इस्तेमाल करके दबाया गया, जबकि अधिकारियों ने ज़रूरी खाने-पीने की चीज़ों, ईंधन और दवाओं की सप्लाई पर रोक लगा दी।
उन्होंने कहा, "पिछले शुक्रवार को इस काउंसिल को बताया गया था कि जून के बाद से पाकिस्तान के कब्ज़े वाले इलाके में कई आम नागरिक मारे गए हैं, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ़्तार किया गया है, और खाने-पीने की चीज़ों व दवाओं की सप्लाई रोकी गई है। जब ये बातें बताई गईं, तो पाकिस्तान ने 'पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर' (प्रक्रिया संबंधी आपत्ति) उठाया। अगर इस कमरे में मौजूद कोई प्रतिनिधिमंडल इस काउंसिल की जांच के सभी ज़रूरी पैमानों पर खरा उतरता है, तो वह पाकिस्तान ही है।" उन्होंने पाकिस्तान की शासन-व्यवस्था की भारी नाकामियों को उजागर किया।