मॉस्को। कोरियाई प्रायद्वीप में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रूस ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर कड़ी आपत्ति जताई है। मॉस्को ने इन युद्धाभ्यासों को उकसावे वाली कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सैन्य गतिविधियों से क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। रूस ने उत्तर कोरिया द्वारा अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी देश को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है।रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के हालिया सैन्य अभ्यासों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया की सीमा के निकट लगातार आयोजित किए जा रहे सैन्य अभ्यास कोरियाई प्रायद्वीप में अस्थिरता बढ़ाने का कारण बन रहे हैं।रूस का आरोप है कि इन अभ्यासों के जरिए उत्तर कोरिया के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन युद्धाभ्यासों को अपनी रक्षा तैयारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते रहे हैं।
रूस ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर लगाए गंभीर आरोप
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार अमेरिका और दक्षिण कोरिया की ओर से आयोजित बड़े सैन्य अभ्यास तनाव कम करने के बजाय उसे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि इन अभ्यासों में उत्तर कोरिया के खिलाफ पहले हमला करने की रणनीतियों का अभ्यास किया जा रहा है। रूस ने दावा किया कि इनमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित संभावित सैन्य परिस्थितियां भी शामिल हैं।मॉस्को ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से उत्तर कोरिया की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है।हालांकि, रूस के इन आरोपों की अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने पुष्टि नहीं की है। दोनों देश लगातार यह कहते रहे हैं कि उनके सैन्य अभ्यास रक्षात्मक प्रकृति के हैं।
उत्तर कोरिया के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन
रूस ने उत्तर कोरिया की सैन्य तैयारियों का समर्थन करते हुए कहा कि प्योंगयांग को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का अधिकार है।मारिया जखारोवा ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित आत्मरक्षा के अधिकार का उल्लेख करते हुए उत्तर कोरिया के सुरक्षा उपायों को उचित बताया।रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि उत्तर कोरिया जिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है, उनमें अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाना उसकी सुरक्षा नीति का हिस्सा है।मॉस्को ने दक्षिण कोरिया से भी अपील की है कि वह उत्तर कोरिया पर आरोप लगाने के बजाय सैन्य गतिविधियों को रोकने और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कदम उठाए।
'फ्रीडम फ्लैग' और 'आयरन मेस' अभ्यास पर आपत्ति
रूस ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के कई सैन्य अभ्यासों का विशेष रूप से उल्लेख किया है।इनमें ‘आयरन मेस’ और ‘फ्रीडम फ्लैग’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया के ‘होगुक’ सैन्य अभ्यास को भी रूस ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों में गिनाया है।फ्रीडम फ्लैग अभ्यास में अमेरिका और दक्षिण कोरिया की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। यह संयुक्त अभ्यास 6 नवंबर तक चलने का कार्यक्रम है।दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त परिचालन क्षमता को बेहतर बनाना है।वहीं, उत्तर कोरिया ने इस अभ्यास को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती बताया है। प्योंगयांग का कहना है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्र में टकराव की आशंका बढ़ाती हैं।
कोरियाई प्रायद्वीप में क्यों बढ़ रहा तनाव?
कोरियाई प्रायद्वीप लंबे समय से दुनिया के संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों में शामिल है। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच राजनीतिक तथा सैन्य तनाव दशकों से बना हुआ है।उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है। दूसरी ओर अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन क्षमताओं को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं।इसी कारण अमेरिका और दक्षिण कोरिया नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं।इन अभ्यासों का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं को किसी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रखना बताया जाता है।हालांकि, उत्तर कोरिया अक्सर इन अभ्यासों को अपने खिलाफ युद्ध की तैयारी करार देता है। रूस ने भी अब इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सैन्य गतिविधियों की आलोचना की है।
उत्तर कोरिया ने भी जताया था विरोध
रूस की प्रतिक्रिया से पहले उत्तर कोरिया भी अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों की आलोचना कर चुका है।उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि फ्रीडम फ्लैग अभ्यास से कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य संघर्ष का जोखिम बढ़ रहा है।प्योंगयांग ने चेतावनी दी थी कि अपनी सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों का जवाब देने के लिए वह आवश्यक कदम उठाएगा।उत्तर कोरिया का कहना है कि उसकी सैन्य क्षमताओं का विकास बाहरी खतरों से निपटने के उद्देश्य से किया जा रहा है।इस बीच 4 नवंबर को उत्तर कोरिया द्वारा समुद्र की दिशा में कई मिसाइलें दागे जाने की भी खबर सामने आई है। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये मिसाइलें उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय क्षेत्र से छोड़ी गईं।
रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकियां
पिछले कुछ वर्षों में रूस और उत्तर कोरिया के बीच राजनीतिक तथा सैन्य सहयोग बढ़ा है।दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं।यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया के संबंधों में विशेष रूप से मजबूती आई है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर भी समझ बढ़ी है।विश्लेषकों के अनुसार रूस का ताजा बयान इसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में देखा जा सकता है।दूसरी ओर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच भी सुरक्षा सहयोग मजबूत हुआ है। इससे पूर्वोत्तर एशिया में अलग-अलग रणनीतिक हितों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती दिखाई दे रही है।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का क्या है पक्ष?
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का लगातार यह रुख रहा है कि उनके संयुक्त सैन्य अभ्यास किसी देश पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि संभावित खतरों से निपटने की तैयारी के लिए आयोजित किए जाते हैं।दोनों देश उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मानते हैं।वॉशिंगटन और सियोल का कहना है कि संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण से उनकी सेनाओं की तैयारी, समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर होती है।हालांकि, रूस और उत्तर कोरिया इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि लगातार सैन्य अभ्यास क्षेत्र में अविश्वास और टकराव को बढ़ावा देते हैं।
क्षेत्रीय शांति के लिए कूटनीतिक बातचीत जरूरी
रूस के ताजा बयान ने कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस को फिर तेज कर दिया है।एक तरफ अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ रूस और उत्तर कोरिया उन्हें उकसावे वाली गतिविधियां मान रहे हैं।ऐसे में सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद की आवश्यकता भी बढ़ गई है।विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए संबंधित देशों के बीच बातचीत, सैन्य पारदर्शिता और तनाव कम करने के उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।फिलहाल रूस के इस बयान से स्पष्ट है कि कोरियाई प्रायद्वीप में जारी सैन्य गतिविधियों को लेकर प्रमुख शक्तियों के बीच मतभेद बने हुए हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया की प्रतिक्रियाएं क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
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