रोम-संत पोप फ्रांसिस द्वारा विवाहित दंपतियों को लिखा एक पत्र रविवार को जारी हुआ। पत्र में पोप ने विवाहित जोड़ों को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही टूटती हुई शादियों के कारण बच्चों पर इसका दुष्प्रभाव पढ़ने की बात भी कही। फ्राँसिस ने कहा शादी में तीन प्रमुख शब्दों को हमेशा याद रखें, 'कृपया, धन्यवाद और क्षमा करें', जिससे छोटी-छोटी बातों पर विवाह तोड़ने की बजाए, एकदम को दूसरा मौका दिया जा सके।

रोम-संत पोप फ्रांसिस ने रविवार को यीशु के परिवार की याद में कैथोलिक दावत के दिन विवाहित जोड़ों को पत्र लिखा। पोप ने पत्र में लिखा कि कोरोना वायरस की महामारी में लगाए गए लाकडाउन और क्वारंटाइन के चलते परिवारों को अधिक समय साथ बिताने का अवसर मिला। 26 दिसंबर को जारी एक पत्र में, उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के चलते कुछ पारिवारिक परेशानियां बढ़ गई हैं। लेकिन विवाहित लोगों को विवाह के संबंध में तीन शब्दों-आग्रह, आभार और क्षमा को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर काफी जोर दिया कि शादीशुदा जिंदगी में आगरा करना, आभार व्यक्त करना और माफ कर देना बहुत महत्वपूर्ण होता है, शादी के बंधन को छोटी मोटी बातों पर टूटने से बचाता है।
लगातार लड़ाई-झगड़े करते हुए जबरदस्ती से साथ रहना कई बार माता-पिता और भाई-बहनों के धैर्य की परीक्षा लेता है और कुछ मामलों में परेशानियों का कारण बन जाती है। सुबह शाम घर में लड़ाई-झगड़े के माहौल से बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
पोप ने पत्र में लिखा, पहले से व्याप्त परेशानियां और बढ़ गई हैं, जिससे संघर्ष उत्पन्न हो रहा है। कुछ मामलों में यह संघर्ष असहनीय हो जाता है। यही नहीं कई बार तो संबंधों में अलगाव तक की स्थिति बन जाती है। उन्होंने अभिभावकों को याद दिलाया कि विवाह टूटने से खासकर बच्चों पर इसका कितना बुरा प्रभाव पड़ता है, जो अपने माता-पिता को स्थिरता, प्यार और विश्वास के स्रोत के रूप में देखते हैं। वैवाहिक संबंधों में अलगाव से सीधे-सीधे काफी नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि कई उम्मीदें दम तोड़ देती हैं। बच्चों को इस बात से काफी तकलीफ होती है कि उनके माता-पिता साथ नहीं रहते हैं।

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