इस्लामाबाद: नेशनल कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस (NCJP) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक संगठन ने कहा कि 2025 में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। संगठन ने बताया कि ईशनिंदा के आरोप और अल्पसंख्यक महिलाओं व लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी का खतरा बना रहा।
'द वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) ने NCJP की 2026 की मानवाधिकार रिपोर्ट का ज़िक्र किया। NCJP, पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस की एक मानवाधिकार संस्था है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल के दौरान आठ ईसाइयों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया और महिलाओं, लड़कियों व परिवारों से जुड़ी 35 घटनाओं को दर्ज किया गया।
संगठन ने आगे बताया कि एक मामला 15 साल की हिंदू लड़की प्रेमी भील का था, जिसका कथित तौर पर दिसंबर में अपहरण कर लिया गया, जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और शादी कर दी गई, जबकि स्थानीय पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया।
अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के चिंताजनक चलन पर गहरी चिंता जताते हुए VOPM ने कहा कि ये कोई इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था को दिखाती हैं जिसमें कमज़ोर नागरिकों को अक्सर कानून के तहत समान सुरक्षा नहीं मिलती है।
रिपोर्ट के नतीजों का हवाला देते हुए, मानवाधिकार संस्था ने पाकिस्तान में ईसाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ जानलेवा हिंसा का ज़िक्र किया। सियालकोट के एक ईसाई मज़दूर काशिफ मसीह को मोबाइल फोन चोरी करने का आरोप लगाकर कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने शुरू में इस घटना को हत्या के तौर पर दर्ज नहीं किया, जिसके बाद ईसाई समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया।
अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार हो रही बर्बरता को उजागर करते हुए, संस्था ने आगे कहा कि पिछले साल सितंबर में अफज़ल मसीह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह ईसाई तीर्थयात्रियों के साथ यात्रा कर रहे थे और उन्होंने कथित तौर पर उन लोगों का विरोध किया था जिन्होंने महिला यात्रियों को परेशान किया था।
VOPM ने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमलों के लिए जवाबदेही बहुत कमज़ोर है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब प्रांत के जरानवाला शहर में 2023 में हुए हमलों के दो साल बाद भी दोषियों को सज़ा नहीं मिली है; उन हमलों में 25 से ज़्यादा चर्चों और 85 ईसाई घरों को नुकसान पहुँचाया गया था। VOPM ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिर्फ़ कानून बनाने से उत्पीड़न खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को समान नागरिकता लागू करनी चाहिए, पूजा-स्थलों की सुरक्षा करनी चाहिए, हमलावरों पर मुकदमा चलाना चाहिए और अल्पसंख्यक महिलाओं व बच्चों की रक्षा करनी चाहिए। कोई देश अपनी धार्मिक विरासत का दावा तब तक नहीं कर सकता, जब तक वह अपनी आबादी के एक हिस्से को डर के साये में रहने देता है।"
उन्होंने आगे कहा, "NCJP की चेतावनी साफ है: जब तक सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकारों को राजनीतिक पसंद का मामला न मानकर संवैधानिक कर्तव्य मानेगी, तब तक उनकी अनदेखी होती रहेगी।"
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