सीएनएन समेत तीन संस्थानों को राहत, व्हाइट हाउस प्रवेश रोकने का फैसला निलंबित
व्हाइट हाउस मीडिया प्रतिबंध
वॉशिंगटन: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश की अनुमति जारी रखने का आदेश दिया है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश टिमोथी केली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को इन संस्थानों के पत्रकारों के प्रवेश पास रद्द करने का फैसला लागू करने से रोक दिया। अदालत ने प्रारंभिक तौर पर माना कि मीडिया संस्थानों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया से जुड़े दावों में सफल होने की संभावना है। हालांकि, मुकदमे में अंतिम फैसला अभी बाकी है।
मंगलवार, 13 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत पत्रकारों की व्हाइट हाउस परिसर तक पहुंच मुकदमे की सुनवाई के दौरान बनी रहेगी। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगी, बशर्ते अपीलीय अदालत इसे बदल न दे। इससे पहले न्यायाधीश केली ने 24 सितंबर को आपात आदेश देकर पत्रकारों की पहुंच अस्थायी रूप से बहाल की थी। अब प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी होने से उन्हें आगे भी प्रवेश मिलता रहेगा। यह राहत संबंधित प्रतिबंध के खिलाफ है और इसे मुकदमे के अंतिम निपटारे के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विवाद की शुरुआत 18 सितंबर को हुई थी, जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इन तीनों संस्थानों के खिलाफ प्रवेश प्रतिबंध की घोषणा की। उन्होंने उनकी कवरेज को गलत और पक्षपातपूर्ण बताते हुए आपत्ति जताई थी। इसके बाद पत्रकारों के व्हाइट हाउस प्रवेश से जुड़े पहचान पत्रों पर कार्रवाई हुई। प्रभावित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उनकी रिपोर्टिंग से असहमति के कारण प्रवेश रोकना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या सरकार पत्रकारों की रिपोर्टिंग या उनके दृष्टिकोण के आधार पर उनकी पहुंच समाप्त कर सकती है। न्यायाधीश केली ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि इन संस्थानों को इसलिए चुना गया क्योंकि राष्ट्रपति उनकी कवरेज को गलत और पक्षपातपूर्ण मानते थे। अदालत ने प्रारंभिक आकलन में इसे दृष्टिकोण के आधार पर गैरकानूनी भेदभाव माना। न्यायाधीश ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी दलीलों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री नहीं होने की बात भी कही।
मीडिया संस्थानों ने अपनी याचिका में अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन और पांचवें संशोधन के तहत संरक्षण का मुद्दा उठाया है। प्रथम संशोधन अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित है, जबकि उचित कानूनी प्रक्रिया का सवाल पांचवें संशोधन के तहत रखा गया। संस्थानों का कहना है कि सरकार ने प्रवेश पास रद्द करने से पहले पर्याप्त सूचना और अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं दिया। अदालत ने इस प्रक्रियागत आपत्ति को भी महत्वपूर्ण माना है।
सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा और गलत सूचना रोकने की दलील दी गई। सरकारी पक्ष का कहना रहा कि व्हाइट हाउस तक पहुंच विशेष अनुमति है और राष्ट्रपति अपने आधिकारिक आवास तथा कार्यस्थल में प्रवेश को नियंत्रित कर सकते हैं। हालांकि, अदालत ने पूछा कि प्रतिबंध की शुरुआती घोषणा में राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार स्पष्ट क्यों नहीं था। न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके आदेश का अर्थ राष्ट्रपति की मीडिया की सटीकता और निष्पक्षता संबंधी हर शिकायत को निराधार मान लेना नहीं है।
ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल कर दी। व्हाइट हाउस का कहना है कि संबंधित संस्थान परिसर के बाहर से भी राष्ट्रपति और प्रशासन की रिपोर्टिंग कर सकते हैं। उसने अदालत के निर्णय से असहमति जताई है। दूसरी ओर, मीडिया संस्थानों के वकील थियोडोर बूट्रस ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि प्रतिबंध से पत्रकारों के साथ जनता के सूचना पाने के हित को भी नुकसान हुआ था।
प्रारंभिक प्रतिबंध के बाद पत्रकारों को परिसर में प्रवेश से रोके जाने के मामले सामने आए थे। प्रेस संगठनों ने भी इस कदम पर चिंता जताई और प्रभावित संस्थानों का समर्थन किया। व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन तथा अन्य मीडिया संगठनों ने पत्रकारों की स्वतंत्र पहुंच के पक्ष में आवाज उठाई थी। फिलहाल अदालती आदेश के कारण संबंधित पत्रकारों की पहुंच बनी हुई है, जबकि प्रतिबंध की वैधता और प्रशासन की अपील पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।