कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए मौजूदा मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार है, लेकिन देश की जमीन छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता। एबीसी न्‍यूज को दिए एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि वह युद्धविराम समझौते तक पहुंचने के लिए तैयार हैं, लेकिन यूक्रेन के लगभग 25 प्रतिशत क्षेत्र को छोड़ने के प्रस्ताव को उन्होंने साफ तौर पर खारिज कर दिया।
जेलेंस्की ने अमेरिका से मिलने वाली सैन्य सहायता में हाल के समय में आई कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में यूक्रेन को अपने पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अमेरिका से केवल 24 इंटरसेप्टर मिसाइलें मिली हैं, जबकि औसतन हर महीने करीब 350 मिसाइलों की जरूरत होती है।
उन्होंने स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि सिर्फ गुरुवार रात को ही कीव पर 30 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि वॉशिंगटन की ओर से जेलेंस्की पर शांति समझौते के लिए कुछ रियायतें देने का दबाव बढ़ रहा है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ताओं में प्रगति न होने के लिए कीव भी जिम्मेदार है।
उधर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को बताया कि रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता नवंबर के पहले हिस्से में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में होने वाली है। उन्होंने कहा कि इन वार्ताओं का मुख्य फोकस संभावित शांति समझौते के बाद रूस और यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था पर होगा।
वहीं, 'इंटरफैक्स-यूक्रेन' समाचार एजेंसी के अनुसार, जेलेंस्की ने भी कहा है कि यूक्रेन अगले महीने अबू धाबी में अमेरिका और रूस के साथ त्रिपक्षीय बैठक के लिए तैयार है। जेलेंस्की ने अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि बातचीत का सही समय काफी हद तक रूस के रुख पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल इसे नवंबर के पहले पखवाड़े में आयोजित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों की भी इस प्रक्रिया में भागीदारी जरूरी है।
जेलेंस्की ने नेताओं के स्तर पर सीधे वार्ता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अब सिर्फ तकनीकी स्तर की बातचीत से आगे बढ़ने का समय आ गया है। उनके अनुसार, कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान केवल शीर्ष नेतृत्व की बैठक में ही संभव है। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सर्वोच्च स्तर पर बातचीत बेहद जरूरी होगी।
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