क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कथित जबरन गुमशुदगी के नए मामले सामने आए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केच जिले से एक व्यक्ति को सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से उसका पता नहीं चल पाया है। वहीं क्वेटा में एक अन्य लापता व्यक्ति के परिवार ने उसकी सुरक्षित वापसी की मांग की है। बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी लंबे समय से मानवाधिकार से जुड़ा विवादित मुद्दा रही है।
केच से अब्दुल्ला के लापता होने का दावा
'द बलूचिस्तान पोस्ट' की 21 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार केच जिले के बिलनागोर इलाके के सोराक निवासी अब्दुल्ला को रविवार को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था। रिपोर्ट में अब्दुल्ला की पहचान बिल्लार के बेटे के रूप में की गई है।स्थानीय सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया कि हिरासत के बाद से अब्दुल्ला के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। परिवार और स्थानीय स्तर पर उसके बारे में जानकारी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और संबंधित मामले में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों का कोई विशिष्ट जवाब रिपोर्ट में शामिल नहीं था।
क्वेटा में जारी है विरोध शिविर
इस बीच 'वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स' यानी VBMP की ओर से क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर कथित जबरन गुमशुदगी के मामलों के खिलाफ विरोध शिविर जारी है।'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार संगठन के चेयरमैन नसरुल्ला बलोच के नेतृत्व में चल रहा यह विरोध शिविर 21 सितंबर को अपने **6,365वें दिन** में प्रवेश कर गया। प्रदर्शन में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारी देने और उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।
गुलाम हैदर कुर्द के परिवार ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
विरोध शिविर के दौरान गुलाम हैदर कुर्द के परिवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके कथित रूप से लापता होने का मामला उठाया।परिवार के अनुसार गुलाम हैदर कुर्द, पुत्र जुम्मा खान, को **12 मार्च 2026** को क्वेटा के ईस्टर्न बाईपास के पास किल्ली पिरकानी क्षेत्र की स्ट्रीट नंबर 19 से हिरासत में लिया गया था। परिवार ने आरोप लगाया कि काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट यानी CTD और दूसरी एजेंसियों के कर्मियों ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थान पर पहुंचा दिया। तब से उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।ये परिवार द्वारा लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इन दावों पर संबंधित पाकिस्तानी एजेंसियों की ओर से किसी मामले-विशिष्ट प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।
अधिकारियों से कई बार संपर्क का दावा
गुलाम हैदर के परिवार का कहना है कि उन्होंने उनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए संबंधित थाने और वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें हिरासत के कारण या वर्तमान स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।परिवार ने कहा कि लंबे समय से कोई सूचना नहीं मिलने के कारण गुलाम हैदर की मां, बहन, भाइयों और दूसरे रिश्तेदारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। परिवार ने अधिकारियों से उनकी सुरक्षित और तत्काल वापसी सुनिश्चित करने की मांग की।परिजनों ने यह भी कहा कि अगर गुलाम हैदर के खिलाफ किसी तरह का आरोप या मामला है तो उन्हें अदालत में पेश किया जाना चाहिए और कानूनी बचाव का अधिकार मिलना चाहिए।
अन्य क्षेत्रों से भी सामने आए दावे
बलूचिस्तान में हाल के दिनों में इसी तरह के और आरोप सामने आए हैं। 21 सितंबर की एक अन्य रिपोर्ट में सुराब और हब से तीन लोगों के कथित रूप से हिरासत के बाद लापता होने की बात कही गई। परिवारों का आरोप है कि उन्हें सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था और इसके बाद उनके ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं मिली।10 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में तुरबत, क्वेटा, खुजदार, पंजगुर, केच और नुश्की सहित अलग-अलग क्षेत्रों से नौ लोगों के कथित तौर पर लापता होने की सूचना दी गई थी। इनमें दो डॉक्टर भी शामिल बताए गए थे। इन सभी मामलों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मानवाधिकार संगठनों ने भी उठाया है मुद्दा
पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा केवल स्थानीय संगठनों तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताते रहे हैं।एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अगस्त 2026 में बलूच छात्र नेता जियांद बलोच से जुड़े एक मामले में कहा था कि वह 24 जुलाई को कथित जबरन गुमशुदगी के बाद 11 दिनों तक लापता रहे और 3 अगस्त को घर लौटे। संगठन के मुताबिक इससे पहले भी वह दो बार कथित जबरन गुमशुदगी का सामना कर चुके थे।सितंबर में एमनेस्टी ने पाकिस्तान में दो लापता अफगान नागरिकों के मामले में भी अधिकारियों से जांच करने और उनके परिवारों को उनके ठिकाने तथा स्थिति के बारे में जानकारी देने की मांग की।
सुरक्षा एजेंसियों पर लगते रहे हैं आरोप
बलूचिस्तान में लापता लोगों के परिवार, स्थानीय अधिकार संगठन और राजनीतिक समूह लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि लोगों को सुरक्षा बलों या खुफिया एजेंसियों द्वारा हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थानों पर रखा जाता है।दूसरी तरफ पाकिस्तानी अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने विभिन्न मौकों पर ऐसे कई आरोपों से इनकार किया है। बलूचिस्तान में सुरक्षा की स्थिति भी जटिल है, जहां कई सशस्त्र अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं और सुरक्षा बलों पर हमले होते रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में हिरासत, आतंकवाद विरोधी अभियानों और लापता लोगों के मामलों को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है।
परिवारों की मांग अदालत में पेश किए जाएं लापता लोग
लापता लोगों के परिजनों और अधिकार समूहों की प्रमुख मांग है कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक या सुरक्षा संबंधी आरोप हैं तो उसे कानून के तहत अदालत के सामने पेश किया जाए। परिवारों का कहना है कि हिरासत की जानकारी और कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच मिलनी चाहिए।गुलाम हैदर कुर्द के परिवार ने भी इसी मांग को दोहराया है। उन्होंने मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से उनके मामले को उठाने की अपील की है।फिलहाल केच निवासी अब्दुल्ला और क्वेटा के गुलाम हैदर कुर्द के मामलों में परिवार उनके ठिकाने की जानकारी और सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं। आरोपों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच तथा संबंधित अधिकारियों की औपचारिक प्रतिक्रिया से ही इन मामलों की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।