जिनेवा। जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट (JSFM) ने बुधवार, 23 सितंबर को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में संगठन के नेताओं और समर्थकों ने सिंध सहित पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में आत्म-निर्णय के सवाल पर संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने संसाधनों के वितरण, सिंधु नदी के पानी, कथित जबरन गुमशुदगी और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मुद्दे भी उठाए।प्रदर्शन को जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट के चेयरमैन सोहेल अब्रो और वॉयस फॉर मिसिंग पर्सन्स ऑफ सिंध के यूरोप चैप्टर के कोऑर्डिनेटर सारंग हैदर ने संबोधित किया। अब्रो ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के भीतर सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सराइकी वासेब और गिलगित-बाल्टिस्तान राजनीतिक, आर्थिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक स्तर पर उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। ये आरोप JSFM और उसके नेताओं के हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।अब्रो ने अपने संबोधन में पंजाब के राजनीतिक और आर्थिक वर्चस्व का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों की ओर से वह आवाज उठा रहे हैं, उन्हें राष्ट्रीय संसाधनों में उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। उन्होंने इस स्थिति को लेकर बेहद तीखी राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया और इसे आत्म-निर्णय के अधिकार से जोड़ा।
NFC अवार्ड को लेकर उठाए सवाल
सोहेल अब्रो ने पाकिस्तान के नेशनल फाइनेंस कमीशन यानी NFC अवार्ड के तहत संसाधनों के वितरण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित क्षेत्रों को संसाधनों में उनका उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ऐतिहासिक क्षेत्रों को नई प्रशासनिक इकाइयों में बांटने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।पाकिस्तान में NFC अवार्ड संघीय और प्रांतीय सरकारों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण से जुड़ा संवैधानिक तंत्र है। संसाधनों के बंटवारे और उसके फॉर्मूले को लेकर पाकिस्तान में लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। हालांकि प्रदर्शन में अब्रो द्वारा लगाए गए संसाधन छीनने संबंधी आरोप JSFM का राजनीतिक दावा हैं।
सिंधु नदी के पानी का मुद्दा भी उठाया
प्रदर्शन के दौरान सिंधु नदी और प्रस्तावित नहरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अब्रो ने आरोप लगाया कि सिंधु नदी के पानी को नियंत्रित करने के लिए छह नहरें बनाने की योजना है। उन्होंने जलालपुर नहर के निर्माण को भी अवैध बताया। ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों का जवाब दर्ज नहीं है।सिंध में पानी के वितरण का सवाल पहले भी राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस का विषय रहा है। सिंध के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने समय-समय पर सिंधु नदी के पानी और नई नहर परियोजनाओं को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।
UN की निगरानी में जनमत संग्रह की मांग
JSFM चेयरमैन ने संयुक्त राष्ट्र से सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सराइकी वासेब और गिलगित-बाल्टिस्तान में उसकी निगरानी में जनमत संग्रह कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे जनमत संग्रह के परिणामों के आधार पर संबंधित क्षेत्रों के भविष्य की राजनीतिक स्थिति तय होनी चाहिए।यह JSFM की राजनीतिक मांग है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस प्रदर्शन या जनमत संग्रह की मांग पर किसी औपचारिक समर्थन या प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है।
कथित जबरन गुमशुदगी का मुद्दा उठा
प्रदर्शन में वॉयस फॉर मिसिंग पर्सन्स ऑफ सिंध के यूरोप चैप्टर के कोऑर्डिनेटर सारंग हैदर ने सिंध में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और जबरन गुमशुदगी के मामलों को उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों के दौरान 3,500 से ज्यादा सिंधी राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं का कथित तौर पर अपहरण कर उन्हें जबरन गायब किया गया।हैदर ने यह भी दावा किया कि 100 से अधिक राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं की हत्या की गई और बाद में उनके शव बरामद हुए। इन संख्याओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती है और इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को एयरपोर्ट, सड़कों, घरों और शैक्षणिक संस्थानों से हिरासत में लेकर गायब किया गया। हैदर के अनुसार सोहेल भट्टी, रोहल लघारी और अयूब कांड्रो समेत 100 से अधिक कार्यकर्ता अभी भी लापता हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि लापता आम नागरिकों की संख्या कार्यकर्ताओं की तुलना में कई गुना ज्यादा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्थाओं से अपील
सारंग हैदर ने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्थाओं से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान सरकार पर कथित रूप से लापता सिंधी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की स्थिति स्पष्ट करने तथा उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाया जाए।जिनेवा में हुआ यह प्रदर्शन सिंध से जुड़े राष्ट्रवादी संगठनों की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए जा रहे राजनीतिक और मानवाधिकार मुद्दों की कड़ी है। प्रदर्शनकारियों ने आत्म-निर्णय, संसाधनों के वितरण, सिंधु नदी के पानी, क्षेत्रीय पहचान और कथित जबरन गुमशुदगी को प्रमुख मुद्दा बनाया।फिलहाल प्रदर्शन में लगाए गए मानवाधिकार उल्लंघन, संसाधनों के बंटवारे और राजनीतिक उत्पीड़न संबंधी कई आरोप JSFM और संबंधित कार्यकर्ताओं के दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में पाकिस्तान सरकार का विस्तृत पक्ष नहीं दिया गया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रदर्शनकारियों की जनमत संग्रह की मांग पर किसी औपचारिक निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।