शंघाई। चीन में भारत के कॉन्सल जनरल प्रतीक माथुर ने बुधवार को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर शंघाई के कार्यवाहक मेयर झू झोंगमिंग को शुभकामनाएं दीं। चीन में 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस मौके को स्थानीय तौर पर ‘गुओ किंग जी’ कहा जाता है। वर्ष 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई थी और 2026 में इसकी 77वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
शंघाई स्थित भारतीय कॉन्सुलेट की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा जानकारी में कहा गया कि कॉन्सल जनरल प्रतीक माथुर ने चीन के राष्ट्रीय दिवस और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 77वीं वर्षगांठ पर झू झोंगमिंग को शुभकामनाएं दीं।
प्रतीक माथुर वर्तमान में शंघाई में भारत के कॉन्सल जनरल हैं। भारतीय कॉन्सुलेट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक वह भारतीय विदेश सेवा के 2007 बैच के अधिकारी हैं। इससे पहले वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक मामलों से जुड़े दायित्व संभाल चुके हैं। उन्होंने बीजिंग और वॉशिंगटन डीसी में भी भारतीय राजनयिक मिशनों में सेवाएं दी हैं।
शंघाई में भारत का कॉन्सुलेट पूर्वी चीन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत के राजनयिक और वाणिज्यिक संपर्क का प्रमुख केंद्र है। इसके अधिकार क्षेत्र में शंघाई के साथ झेजियांग और जियांगसू भी आते हैं। कॉन्सुलेट भारतीय नागरिकों से संबंधित सेवाओं के साथ-साथ व्यापार, निवेश, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क से जुड़े कार्यक्रमों में भी भूमिका निभाता है।
वहीं झू झोंगमिंग फिलहाल शंघाई के वाइस मेयर और कार्यवाहक मेयर हैं। शंघाई नगर सरकार की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें इसी पद पर सूचीबद्ध करती है। झू का जन्म अप्रैल 1972 में हुआ था और उन्होंने हाल के दिनों में शंघाई नगर सरकार की जिम्मेदारी संभाली है। कार्यवाहक मेयर के तौर पर उनके पास शहर की सरकार के समग्र कामकाज का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी है।
झू झोंगमिंग का शंघाई के शीर्ष प्रशासनिक पद पर पहुंचना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह 1970 के दशक में जन्मे नेताओं की उस नई पीढ़ी में शामिल हैं, जो चीन के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक की प्रशासनिक कमान संभाल रही है। शंघाई चीन का बड़ा आर्थिक, औद्योगिक और वित्तीय केंद्र है और यहां का नगर नेतृत्व राष्ट्रीय राजनीति में भी लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
शंघाई के मेयर पद से जुड़े कई नेता बाद में चीन की राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख जिम्मेदारियों तक पहुंचे हैं। जियांग जेमिन ने 1985 में शंघाई के मेयर के रूप में काम शुरू किया था और बाद में चीन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। इसी तरह झू रोंगजी ने 1987 से 1991 के बीच शंघाई में उप पार्टी सचिव, मेयर और पार्टी सचिव के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में चीन के प्रधानमंत्री बने।
चीन के मौजूदा उपराष्ट्रपति हान झेंग भी लंबे समय तक शंघाई की राजनीति और प्रशासन से जुड़े रहे। वह 2003 से 2012 तक शंघाई के मेयर रहे और इसके बाद शहर के कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख बने। बाद में उन्होंने चीन के उप प्रधानमंत्री और फिर उपराष्ट्रपति का पद संभाला।
हान झेंग ने हाल ही में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस में चीन की ओर से बयान भी दिया। 26 सितंबर 2026 को दिए अपने संबोधन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, वैश्विक सुरक्षा, विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चीन का पक्ष रखा।
चीन में राष्ट्रीय दिवस से पहले अलग-अलग शहरों और राजनयिक मिशनों में 77वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बीजिंग में भी 30 सितंबर को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर आधिकारिक समारोह आयोजित किया गया।
भारत में भी चीन के दूतावास ने सितंबर में 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक स्वागत समारोह आयोजित किया था, जिसमें भारतीय अधिकारियों, राजनयिकों, कारोबारी प्रतिनिधियों और अन्य मेहमानों ने हिस्सा लिया।
शंघाई में प्रतीक माथुर की ओर से दी गई शुभकामना दोनों देशों के स्थानीय राजनयिक संपर्क का हिस्सा है। शंघाई में भारतीय कॉन्सुलेट लगातार व्यापार, उद्योग, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। वर्ष 2026 में भी कॉन्सुलेट ने भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों और चीनी कारोबारी समूहों के बीच संवाद के लिए कई कार्यक्रम किए।
चीन का राष्ट्रीय दिवस हर साल 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस मौके पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं। राष्ट्रीय दिवस से पहले भारतीय कॉन्सल जनरल की ओर से शंघाई के कार्यवाहक मेयर झू झोंगमिंग को दी गई बधाई को औपचारिक राजनयिक शिष्टाचार और स्थानीय स्तर पर संपर्क बनाए रखने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है।
इस अवसर पर दोनों पक्षों के बीच शंघाई और भारत के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक तथा लोगों के स्तर पर संपर्क को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी ध्यान बना हुआ है। शंघाई पूर्वी चीन का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शहर होने के कारण भारत के लिए आर्थिक और राजनयिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
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