इस्लामाबाद। पाकिस्तान में शिक्षित युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी और व्यावसायिक कौशल की कमी ने देश की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को उजागर किया है। पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण की कमी के कारण न केवल युवाओं के भविष्य पर असर पड़ रहा है, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भी हर साल अरबों डॉलर का संभावित नुकसान हो रहा है।रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के केवल सात प्रतिशत युवाओं को ही औपचारिक तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलता है। यह आंकड़ा क्षेत्रीय औसत 22 प्रतिशत से काफी कम है। ऐसे में शिक्षा और रोजगार बाजार की जरूरतों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
हर साल 31.5 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, विश्व बैंक के अनुमान में कौशल की कमी के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 31.5 अरब अमेरिकी डॉलर का संभावित आर्थिक नुकसान होता है। यह नुकसान मुख्य रूप से श्रमिक उत्पादकता में कमी और निर्यात के उन अवसरों से जुड़ा है, जिनका देश पर्याप्त लाभ नहीं उठा पा रहा है।व्यावसायिक कौशल की कमी का असर उद्योगों और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। जब श्रमिकों के पास संबंधित क्षेत्र की आवश्यक तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं होता, तो उनकी उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।इस चुनौती से निपटने के लिए शिक्षा व्यवस्था को रोजगार बाजार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक बताया जा रहा है।
सिर्फ सात प्रतिशत युवाओं को मिलता है प्रशिक्षण
पाकिस्तान में तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण की सीमित उपलब्धता बेरोजगारी की समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आई है।'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, देश के केवल सात प्रतिशत युवाओं को औपचारिक कौशल प्रशिक्षण मिलता है, जबकि क्षेत्रीय औसत 22 प्रतिशत है।इस अंतर से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान को अपने युवाओं के कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। केवल औपचारिक शिक्षा प्राप्त कर लेना रोजगार सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
डिग्री लेने के बाद भी रोजगार की तलाश
पाकिस्तान में शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी भी चिंता का विषय बनी हुई है। विश्व आर्थिक मंच की 12 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान श्रम बल सर्वेक्षण 2024-25 के विश्लेषण का उल्लेख किया गया है।इसके अनुसार, 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग के स्नातक युवाओं में बेरोजगारी दर 32.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात को सामने लाता है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।शिक्षा और नौकरी के अवसरों के बीच यह अंतर पाकिस्तान की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को बढ़ा रहा है।
विश्व आर्थिक मंच की बैठक में उठा मुद्दा
पाकिस्तान में युवाओं की बेरोजगारी और कौशल विकास से जुड़ी चुनौतियों को विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक 'ग्लोबल फ्यूचर लीडर्स' बैठक में भी चर्चा का विषय बनाया गया है।दुबई में मंगलवार से शुरू हुई इस बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पाकिस्तान के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का मुद्दा शामिल किया गया है।चर्चा का विषय यह है कि आधुनिक तकनीक के तेजी से बदलते दौर में युवाओं को रोजगार के लिए किस प्रकार तैयार किया जाए और शिक्षा तथा रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कैसे कम किया जाए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में नई चुनौती
विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ रोजगार बाजार में आवश्यक कौशल भी बदल रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान जैसे देशों के सामने युवाओं को आधुनिक तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षित करने की चुनौती है।विशेषज्ञ स्तर की चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि केवल कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं को करियर मार्गदर्शन, रोजगार संबंधी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।
शिक्षा और रोजगार व्यवस्था में सुधार की जरूरत
पाकिस्तान में युवाओं की बेरोजगारी के समाधान के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत सामने आई है।देश में तकनीकी प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाने, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने और युवाओं को रोजगार योग्य कौशल प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है।वर्तमान स्थिति पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक चुनौती बनी हुई है। यदि कौशल विकास और रोजगार के अवसरों के बीच अंतर कम किया जाता है, तो इससे युवाओं की उत्पादकता, आर्थिक भागीदारी और निर्यात क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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