राफेल में नया हथियार, हवा में ही ड्रोन को करेगा तबाह

Update: 2026-07-14 10:51 GMT

पेरिस। ड्रोन से बढ़ते खतरे को देखते हुए फ्रांस ने अपने राफेल फाइटर जेट्स को नई क्षमता से लैस किया है। फ्रांस ने राफेल विमानों में 68mm लेजर-गाइडेड रॉकेट को शामिल किया है, जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही निशाना बनाकर नष्ट करने में सक्षम होंगे। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दुनियाभर में छोटे और कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कई देशों की सेनाएं अब महंगी एयर-टू-एयर मिसाइलों के बजाय ऐसे हथियारों की तलाश कर रही हैं, जो कम खर्च में प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकें।

ड्रोन रोधी क्षमता बढ़ाने की तैयारी

फ्रांस ने इस योजना को 'Lutte anti-drone sur avion de combat' (Ladac) नाम दिया है। इसका उद्देश्य फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल को लड़ाकू विमानों से ड्रोन के खिलाफ प्रभावी और किफायती क्षमता उपलब्ध कराना है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोग्राम के तहत राफेल में 68mm लेजर-गाइडेड रॉकेट को सफलतापूर्वक जोड़ा गया है। यह तकनीक खासतौर पर छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन खतरों से निपटने के लिए विकसित की गई है।

महंगी मिसाइलों का किफायती विकल्प

आमतौर पर लड़ाकू विमान दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को गिराने के लिए महंगी एयर-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, छोटे ड्रोन के खिलाफ ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल काफी महंगा साबित हो सकता है। इसी समस्या को देखते हुए फ्रांस ने कम लागत वाले लेजर-गाइडेड रॉकेट का विकल्प चुना है। यह हथियार कम खर्च में ज्यादा संख्या में ड्रोन को निशाना बनाने में मदद कर सकता है।

DGA रिपोर्ट में सामने आई जानकारी

फ्रांस की रक्षा खरीद एजेंसी DGA (Direction Générale de l'Armement) की रिपोर्ट के अनुसार, इस एकीकरण का काम फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल के Centre d'expertise aérienne militaire (CEAM) के सहयोग से पूरा किया गया। इस परियोजना में राफेल निर्माता कंपनी Dassault Aviation और रक्षा तकनीक कंपनी Thales ने भी अहम भूमिका निभाई।

राफेल की क्षमता में बड़ा इजाफा

राफेल पहले से ही अपनी अत्याधुनिक युद्ध क्षमताओं के लिए जाना जाता है। इसमें नई एंटी-ड्रोन क्षमता जुड़ने से इसकी भूमिका और मजबूत होगी। लेजर-गाइडेड रॉकेट तकनीक के जरिए पायलट दुश्मन के ड्रोन को अधिक सटीकता से निशाना बना सकेंगे। यह खासतौर पर उन परिस्थितियों में उपयोगी होगा, जहां बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ हमला कर सकते हैं।

बढ़ते ड्रोन खतरे के बीच बड़ा कदम

हाल के वर्षों में युद्ध क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होने के कारण छोटे ड्रोन अब सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

फ्रांस का यह कदम दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में अब सिर्फ बड़े हथियार ही नहीं, बल्कि कम लागत वाली तकनीक भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। राफेल में नए रॉकेट सिस्टम के शामिल होने से फ्रांसीसी वायुसेना को ड्रोन खतरों से निपटने में अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।

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