यरुशलम : 28 अक्टूबर 2026। इजरायल में आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया है। नेतन्याहू ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में इजरायल ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने पूरे मध्य पूर्व की तस्वीर बदल दी है। बुधवार तड़के यरुशलम में अपनी लिकुड पार्टी के मुख्यालय पर समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, मंत्रियों और गठबंधन सहयोगियों का आभार जताया। शुरुआती चुनावी अनुमानों में उनकी लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि, उनके नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आवश्यक स्पष्ट बहुमत अभी हासिल नहीं हुआ है। ऐसे में इजरायल में अगली सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है।
नेतन्याहू बोले- हमने मध्य पूर्व की तस्वीर बदल दी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव के बाद अपने संबोधन में पिछले तीन वर्षों के दौरान इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों और सुरक्षा नीति का उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि इजरायली सेना, सरकार और देश के नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ऐसी उपलब्धियां हासिल हुई हैं, जिन्होंने मध्य पूर्व की राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों को बदल दिया।नेतन्याहू ने अपने भाषण में हमास, हिजबुल्लाह और ईरान उन्होंने दावा किया कि इन कार्रवाइयों से इजरायल के सामने मौजूद सुरक्षा खतरे कम हुए हैं और देश की सैन्य स्थिति मजबूत हुई है।हालांकि, नेतन्याहू के इन दावों को उनके राजनीतिक और सैन्य आकलन के रूप में देखा जा रहा है। गाजा, लेबनान और ईरान में संघर्षों के मानवीय तथा क्षेत्रीय परिणाम अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं।
लिकुड पार्टी सबसे बड़ी, लेकिन बहुमत पर संशय
27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को शुरुआती एग्जिट पोल में बढ़त मिली है।इजरायली टीवी चैनलों के अनुमानों के अनुसार, लिकुड को लगभग 27 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट की याशार पार्टी को लगभग 21 से 22 सीटें मिल सकती हैं।इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए।28 अक्टूबर को लगभग 51.8 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद नेतन्याहू समर्थक गठबंधन के खाते में करीब 55 सीटें आने का अनुमान था। इस आंकड़े के अनुसार गठबंधन बहुमत से छह सीट पीछे था।इसलिए सबसे बड़ी पार्टी बनने और सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन मिलने में अभी महत्वपूर्ण अंतर है।
समर्थकों को दिया धन्यवाद, कहा- लिकुड पर जनता ने जताया भरोसा
नेतन्याहू ने चुनाव के बाद समर्थकों के उत्साह के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं, उम्मीदवारों और गठबंधन सहयोगियों का धन्यवाद किया।उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान कई सर्वेक्षणों में लिकुड को कमजोर दिखाया गया था, लेकिन शुरुआती परिणामों ने पार्टी के समर्थन का अलग संकेत दिया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि वास्तविक चुनाव परिणाम अभी आने बाकी हैं और अंतिम तस्वीर स्पष्ट होने में एक-दो दिन लग सकते हैं।उन्होंने अपने समर्थकों से एकजुट रहने की अपील की और भरोसा जताया कि वह दक्षिणपंथी सरकार बनाने के लिए प्रयास करेंगे।हालांकि, नेतन्याहू ने अपने संबोधन में औपचारिक रूप से चुनाव जीतने की घोषणा नहीं की।
ईरान को लेकर नेतन्याहू ने दिया बड़ा बयान
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने ईरान के मुद्दे को विशेष महत्व दिया।उन्होंने दावा किया कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों से ईरान कमजोर हुआ है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर ईरान से संबंधित सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की बात भी कही।नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के सामने एक ऐतिहासिक अवसर है और देश को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।उनके अनुसार, ईरान के परमाणु और सैन्य कार्यक्रम से जुड़े खतरे इजरायल के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।हालांकि, ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी तनाव के कारण पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। सैन्य टकराव और उसके संभावित क्षेत्रीय प्रभावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है।
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने भी किया सरकार बनाने का दावा
नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट ने भी चुनाव परिणामों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।आइजेनकोट ने कहा कि इजरायली जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने नेतन्याहू के नेतृत्व और उनकी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए नई सरकार बनाने का दावा किया।विपक्ष ने चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, गाजा युद्ध, महंगाई, सैन्य सेवा और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।आइजेनकोट ने कहा कि वह ऐसी सरकार बनाने का प्रयास करेंगे, जो देश के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करे।शुरुआती एग्जिट पोल में नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला सामने आया था। कुछ अनुमानों में दोनों प्रमुख गुटों को 51-51 सीटें मिलती दिखाई गई थीं।
अरब दलों की भूमिका हो सकती है महत्वपूर्ण
इजरायल चुनाव में अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली राजनीतिक पार्टियों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।शुरुआती चुनावी अनुमानों में इन दलों की संसदीय ताकत बढ़ने के संकेत मिले हैं।यदि नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन में से कोई भी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाता है, तो सरकार गठन के दौरान अन्य दलों का समर्थन निर्णायक हो सकता हैहालांकि, नेतन्याहू ने अपने भाषण में अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार बनाने का विरोध किया।उनके इस बयान से चुनाव के बाद गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।दूसरी ओर, विपक्ष के सामने भी अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को साथ लाने की चुनौती बनी हुई है।
चुनाव परिणामों के बाद क्या होगा?
इजरायल की चुनाव प्रणाली के अनुसार, मतदान के बाद अंतिम परिणामों की घोषणा होती है। इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करके उस सांसद को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना मानी जाती है।सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है।यदि किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो विभिन्न पार्टियों के बीच बातचीत और समझौते की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।28 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतिम चुनाव परिणाम गुरुवार शाम या शुक्रवार सुबह तक आने की उम्मीद है।
इजरायल की राजनीति में अगले कुछ दिन अहम
इजरायल में यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले और उसके बाद शुरू हुए व्यापक क्षेत्रीय संघर्षों के बाद आयोजित हुआ है।इस दौरान नेतन्याहू सरकार की सुरक्षा नीति, सैन्य कार्रवाइयों और घरेलू प्रशासनिक फैसलों को लेकर राजनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं।नेतन्याहू समर्थक उनकी सुरक्षा नीतियों और सैन्य उपलब्धियों को महत्व दे रहे हैं, जबकि विपक्ष उनकी सरकार की जवाबदेही, युद्ध के परिणामों और आर्थिक समस्याओं पर सवाल उठा रहा है।फिलहाल लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर बढ़ रही है, लेकिन अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी, यह अंतिम नतीजों और गठबंधन वार्ताओं से तय होगा।
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