वर्ल्ड | नेपाल में राजशाही की वापसी की मांग फिर से तेज हो गई है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने इस पर कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह राजनीति के लिए उपयुक्त नहीं हैं और नेपाल का भविष्य लोकतंत्र में ही सुरक्षित है।
राजशाही की मांग पर बढ़ा विवाद
हाल ही में नेपाल में राजशाही समर्थकों ने प्रदर्शन किए और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को फिर से सत्ता में लाने की मांग उठाई। इन प्रदर्शनों के बीच देउबा ने कहा कि नेपाल ने लोकतंत्र के लिए लंबा संघर्ष किया है, और अब पीछे लौटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
देउबा का करारा जवाब
देउबा ने स्पष्ट किया कि नेपाल की जनता ने राजशाही को खारिज कर दिया था और अब देश को स्थिरता और विकास की जरूरत है, न कि राजशाही की वापसी की। उन्होंने कहा, "ज्ञानेंद्र शाह राजनीति के लिए उपयुक्त नहीं हैं। नेपाल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना चाहिए।"
राजनीतिक हलचल तेज
नेपाल में कुछ समय से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है, और इसी बीच राजशाही समर्थकों ने अपने आंदोलन तेज कर दिए हैं। हालांकि, मुख्यधारा के राजनीतिक दल राजशाही की वापसी को पूरी तरह नकार चुके हैं।
आगे क्या?
नेपाल की राजनीति में यह बयान बड़ा प्रभाव डाल सकता है। राजशाही समर्थकों के विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है, लेकिन नेपाल की मुख्य राजनीतिक ताकतें लोकतंत्र बनाए रखने के पक्ष में हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है।