हिंद महासागर पर Modi–सेशेल्स चर्चा में सहयोग पर जोर

Update: 2026-06-28 10:48 GMT

Victoria विक्टोरिया : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत हिंद महासागर को ऐसे क्षेत्र के रूप में देखता है जहां आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा भी मजबूत और सुनिश्चित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति में साझेदारी का आधार आकार या शक्ति नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, भरोसा और साझा हित होने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद कही, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और भविष्य की दिशा पर विस्तृत चर्चा की।

नई दिल्ली और विक्टोरिया के बीच बढ़ते संबंधों के संदर्भ में हुई इस बैठक को दोनों देशों के रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि हिंद महासागर केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इस क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग बेहद आवश्यक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में कहा कि भारत चाहता है कि हिंद महासागर ‘मौकों का महासागर’ बने, जहां सभी देशों को समान अवसर मिलें और कोई भी देश विकास की दौड़ में पीछे न रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री सुरक्षा और आर्थिक प्रगति एक-दूसरे से जुड़े हुए पहलू हैं और दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी के साथ हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और विकास साझेदारी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त प्रयास और सहयोग आवश्यक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से अपने पड़ोसी देशों और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) नीति इसी दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है।

बैठक में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। इसमें समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और समुद्री संसाधनों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने माना कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं और समय के साथ यह साझेदारी और गहरी हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों से लोगों के संबंधों पर भी आधारित है।

सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी ने भारत के साथ सहयोग को और आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत का समर्थन छोटे द्वीपीय देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में। उन्होंने भारत की भूमिका को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। भारत ने सेशेल्स के विकास प्रयासों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इस क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत का यह दृष्टिकोण स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान कि ‘हिंद महासागर को मौकों का महासागर बनाया जाए’, भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें क्षेत्रीय देशों के बीच समानता और सहयोग पर जोर दिया गया है। यह दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को और मजबूत करता है।

इस बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि भारत और सेशेल्स के बीच संबंध केवल औपचारिक नहीं हैं, बल्कि यह एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हो रहे हैं। दोनों देशों का साझा लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देना है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी के बीच हुई यह बातचीत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका और दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से सामने लाती है, जहां सहयोग, सम्मान और साझा विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

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